नई दिल्ली। श्रीलंकाई तमिल मुद्दे पर द्रमुक द्वारा यूपीए सरकार से समर्थन वापसी के बाद बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमारी सरकार लंगड़ी नहीं हैं। हमारी सरकार स्थिर है और वह अपना कार्यकाल पूरा करेगी। वहीं, वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि श्रीलंकाई तमिल मामले में सरकार संयुक्त राष्ट्र में संशोधन प्रस्ताव लाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्ताव लाने के लिए सभी दलों से बातचीत जारी है। उम्मीद है जल्द ही कुछ न कुछ हल निकल आएगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि विपक्ष और कुछ सहयोगियों की असहमति के कारण सरकार संसद में प्रस्ताव नहीं लाना चाहती है।

संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ और सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के साथ प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने श्रीलंकाई तमिलों के मसले पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। इस मसले पर सरकार का रुख बताने के लिए वे गुलाम नबी आजाद और एके एंटनी के साथ चैन्नई में करुणानिधि से मिले थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की भावना के अनुरूप हमने द्रमुक के प्रमुख के समक्ष अपने बातें रखी थीं। गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने कल कहा था कि वह संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव लाए जाने के पक्ष में हैं।

संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि संसद में प्रस्ताव लाने के लिए विभिन्न दलों से बातचीत जारी है। उम्मीद है जल्द ही सहमति बन जाएगी। एक सवाल के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि द्रमुक के समर्थन वापसी के बावजूद संप्रग सरकार लंगड़ी नहीं है। सरकार बिल्कुल स्थिर है और वह अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

उधर, सूत्रों ने दावा किया है कि सरकार संसद में किसी भी तरह का प्रस्ताव लाना नहीं चाहती है। सरकार की प्रमुख सहयोगी एनसीपी के मुखिया शरद पवार के हवाले से यह कहा जा रहा है कि वह इसके खिलाफ है।

गौरतलब है कि करुणानिधि ने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूएन और संसद में प्रस्ताव पास कराने पर असहमति के कारण ही सरकार से समर्थन वापस लिया है।

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