नई दिल्‍ली, जेएनएन। कोरोना संक्रमण हर व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव छोड़ रहा है। दिल, फेफड़ों व ब्लड प्रेशर के मरीजों को यह आसानी से अपनी गिरफ्त में ले सकता है। आइएएनएस के अनुसार अब एक नए अध्ययन में पता चला है कि जिनकी रीढ़ की हड्डी कमजोर हो, टूटी हुई हो अथवा उसमें दरार आ गई हो, उनके लिए कोरोना संक्रमण ज्यादा घातक हो जाता है।

यह है वजह : वर्टेब्रल फ्रैक्चर यानी रीढ़ से जुड़ी हड्डी का क्षतिग्रस्त होना। ऐसा तब होता है जब रीढ़ की हड्डी से जुड़ी वर्टेब्रल बॉडी (हड्डी के शीर्ष पर स्थित संवेदनशील टिश्यू) खत्म हो जाती हैं या उनके जोड़ जाम होने लगते हैं। आइएएनएस के अनुसार इसके कारण दर्द, अंग विकृति व हड्डियों में संकुचन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसा ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी के कारण भी होता है, जिसमें हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं।

कमजोरी की निशानी है वर्टेब्रल फ्रैक्चर : क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म नामक पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन के मुख्य लेखक व इटली स्थित सैन रैफेल विटा-सैल्यूट यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ता एंड्रिया गिउस्टिना के अनुसार, वर्टेब्रल फ्रैक्चर कमजोरी की निशानी है। आइएएनएस के अनुसार पहली बार हमने पाया कि इस प्रकार की समस्या से पीड़ित व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की गंभीरता ज्यादा हो जाती है। साफ शब्दों में कहें तो उसकी जान को खतरा दो गुना हो जाता है।

हृदय व श्वसन प्रणाली प्रभावित : वर्टेब्रल फ्रैक्चर के कारण कोरोना संक्रमित की हृदय व श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे बीमारी का प्रभाव बढ़ जाता है। इसकी जानकारी होने पर इलाज में मदद मिलती है। छाती का एक्स-रे जरूरी छाती के समान्य एक्स-रे के जरिये वर्टेब्रल फ्रैक्चर का पता चल जाता है। समय पर अस्पताल में भर्ती कराए जाने और समुचित उपचार से कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है।

बुजुर्गों का रखें खास ध्यान : शोधकर्ताओं ने 114 कोरोना संक्रमितों के एक्स-रे का अध्ययन किया। 35 फीसद लोगों में वर्टेब्रल फ्रैक्चर की समस्या थी। ज्यादातर लोग उम्रदराज थे और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर व दिल संबंधी बीमारियां भी थीं। उन्हें वेंटीलेटर की जरूरत ज्यादा थी और उनकी जान को खतरा भी दोगुना अधिक था।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021