नई दिल्ली, जेएनएन। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सहित देश के 102 शहरों में अब प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर एक विशेष अभियान चलेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी में गुरुवार को इन शहरों का जिम्मा संभालने वाले 18 राज्यों के प्रदूषण बोर्ड और राज्यों के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के साथ पर्यावरण मंत्रालय ने एक समझौता (एमओयू) भी किया है। इसके तहत प्रदूषण को कम करने में तकनीकी संस्थान पूरी मदद करेंगे। संस्थानों से इसे लेकर पहले ही एक सहमति पत्र लिया गया है।

प्रदूषण से निपटने की इस मुहिम में तकनीकी संस्थानों को शामिल करने का यह कदम दिल्ली के अनुभव के बाद उठाया गया है। जहां आइआइटी दिल्ली की तकनीकी मदद के बाद सुधार की दिशा में तेजी से कदम बढ़े हैं। स्थिति यह है कि 2016 की तुलना में 2018 में दिल्ली में पीएम 2.5 के स्तर में 15 फीसद की वार्षिक कमी दर्ज हुई है। जबकि 2017 की तुलना में सात फीसद वार्षिक कमी आयी है।

वायु प्रदूषण से निपटने की मुहिम में निश्चित ही सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। बावजूद इसके खुश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि दिल्ली जैसे शहरों में पीएम 2.5 का स्तर अभी भी स्टैंडर्ड औसत से तीन गुणा ज्यादा है। पीएम 2.5 का स्टैंडर्ड औसत 140 माइक्रोग्राम के आसपास है। योजना के तहत 2024 तक पीएम-10 और पीएम 2.5 के स्तर में करीब 25 से 30 फीसद की कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु अभियान (एनसीएपी) के तहत 102 शहरों के बढ़ते प्रदूषण को कम करने की मुहिम शुरू की गई है। फिलहाल इन सभी शहरों ने इससे निपटने के लिए अपनी एक कार्ययोजना भी तैयार की है। इसमें से करीब 80 शहरों की कार्ययोजना को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी भी दे दी है।

इनमें अकेले उत्तर प्रदेश के वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर सहित कुल 15 शहर शामिल हैं, जहां आइआइटी कानपुर के साथ तकनीकी मदद के लिए करार किया गया है। जबकि बिहार से पटना, गया और मुजफ्फरपुर को शामिल किया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश से भोपाल, इंदौर सहित कुल सात शहर हैं। झारखंड से अकेले सिर्फ धनबाद शहर इनमें शामिल है।

दिल्ली में वायु प्रदूषण के खराब दिनों में आई 33 फीसद कमी : जावड़ेकर
वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की खबरों से परेशान केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि वायु प्रदूषण समस्या है, लेकिन स्थिति इतनी भी खराब नहीं है। लगातार सुधार की दिशा में काम किया जा रहा है। दिल्ली में 2014 के बाद वायु प्रदूषण के खराब दिनों की संख्या में 33 फीसद की कमी आयी है। 2014 में ऐसे दिन जहां 300 थे, वही 2016 में यह घटकर 246 और 2017 में यह 213 दिन रह गए है। अभी 2018 का आंकड़ा आना बाकी है।

केंद्रीय मंत्री ने मॉस्क बांधकर वायु प्रदूषण पर ताना कसने वालों को भी चेताया और कहा कि ऐसा करने से प्रदूषण में कमी नहीं आने वाली है। बल्कि सभी को इसके लिए अपने स्तर से सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि 2020 तक वीएस-6 फ्यूल और गाडि़यां सड़कों पर दिखेगी। इसके लिए करीब साठ हजार करोड़ की निवेश किया जा रहा है। इससे प्रदूषण में और कमी आएगी।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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