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सोनिया गांधी ने किया इंस्टाग्राम डेब्यू, पहली पोस्ट में दिखाई आत्मकथा 'Belonging' की झलक

Published: Thu, 22 Oct 2026 12:10 PM (IST)

सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर डेब्यू करते हुए अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' की पहली झलक साझा की, जो 10 नवंबर को रिलीज होगी।

HighLights

  1. सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर किया पहला पोस्ट।

  2. आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' की झलक दिखाई।

  3. किताब 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी रिलीज।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर डेब्यू किया। उन्होंने अपनी आने वाली किताब बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव की पहली झलक साझा की, जो 10 नवंबर को रिलीज होने वाली है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी पहली पोस्ट में 79 वर्षीय कांग्रेस नेता ने पाठकों के सामने अपनी किताब पेश करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, "नमस्ते सभी को आप सभी के साथ इस पल को साझा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव की पहली झलक है।"

'अपनेपन को खोजने की कहानी'

पोस्ट में आगे कहा गया, "यह कहानी प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनापन खोजने की है। मैं इसे आपके साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।" यह संस्मरण कांग्रेस सांसद की उस यात्रा को दर्शाता है, जो युद्ध के बाद के इटली में उनके बचपन से शुरू होकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ उनके रिश्ते तक जाती है। इसमें उन व्यक्तिगत नुकसानों का भी जिक्र है, जिन्होंने उनके जीवन और भारत के साथ उनके संबंधों को आकार दिया।

संस्मरण में बचपन, राजीव गांधी और पारिवारिक त्रासदियों का जिक्र है। यह किताब इटली में सोनिया के शुरुआती वर्षों, कैम्ब्रिज में रहने के दौरान राजीव गांधी के साथ उनके रोमांस और उनकी सास (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) तथा उनके पति की हत्याओं के बारे में बताती है।

इटली में जन्मीं सोनिया गांधी 19 साल की थीं, जब 1965 में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। इस जोड़े ने 25 फरवरी, 1968 को शादी कर ली। बाद में सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं।

माना जा रहा है कि उनके इस संस्मरण में प्यार, पहचान, कर्तव्य और अपनापन जैसे विषयों पर उनके निजी अनुभव सामने आएंगे। साथ ही इसमें नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य के रूप में उनके अनुभवों और भारत में उनके जीवन की झलक भी मिलेगी।

किताब को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने पहले ही इस किताब को लेकर अपना उत्साह जाहिर किया था। अपने पिता राजीव गांधी की 82वीं जयंती पर लोकसभा में विपक्ष के नेता ने लिखा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी मां की कहानी पाठकों तक पहुंचेगी।

राहुल गांधी ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं और मुझे बहुत गर्व है कि आपकी कहानी बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव आखिरकार उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी जो आपसे प्यार करते हैं। मैं जानता हूं कि आप जैसी निजी स्वभाव वाली इंसान के लिए दुनिया को अपनी यह खूबसूरत कहानी बताना कितना मुश्किल रहा होगा। आज उनके जन्मदिन पर मैं कल्पना कर सकता हूं कि पापा मुस्कुरा रहे होंगे और गर्व से अपनी प्यारी सोनिया को देख रहे होंगे।"

किताब के प्रकाशन को लेकर अनिश्चितता

भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह संस्मरण 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्फ्रेड ए. नॉफ (जो नॉफ डबलडे पब्लिशिंग ग्रुप का एक हिस्सा है) द्वारा प्रकाशित किया जाना है। इसकी घोषणा 18 अगस्त को की गई थी।

ऐसा पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) और लेखिका के प्रतिनिधियों के बीच संपादकीय बदलावों को लेकर हुए मतभेद के कारण हुआ है। पेंगुइन इंडिया ने कहा कि सामान्य संपादकीय समीक्षा के दौरान प्रकाशन प्रक्रिया एक खास मुद्दे पर अटक गई। प्रकाशक ने बताया कि कुछ प्रस्तावित बदलावों को मान लिया गया था और कुछ अन्य मामलों में लेखक के पक्ष को भी स्वीकार कर लिया गया, लेकिन एक मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।

पेंगुइन इंडिया ने इस बात से इनकार किया कि उनके फैसले पर कोई बाहरी दबाव था। साथ ही अनुबंध की शर्तों और लेखक की गोपनीयता का हवाला देते हुए उन्होंने इस असहमति के बारे में कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया।

राजनीतिक विवाद

इस विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय क्षेत्र पर चीन के कब्जे से जुड़े हिस्सों को हटाने के लिए दबाव डाला गया था। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

पेंगुइन इंडिया ने बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी समीक्षा प्रक्रिया में सामान्य संपादकीय कदम शामिल थे, जैसे कि तथ्यों की जांच (फैक्ट-चेकिंग) और सुझाव देना।

बाद में हार्परकॉलिन्स इंडिया ने इसका भारतीय संस्करण प्रकाशित करने की जिम्मेदारी ली। उम्मीद है कि यह किताब उसी तारीख को भारतीय पाठकों तक पहुंच जाएगी, जिस दिन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किया जाएगा। पेंगुइन इंडिया के इस समझौते से बाहर हो जाने के बाद भारतीय संस्करण को लेकर स्थिति विवाद का विषय बनी रही।

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