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'SIR खत्म होने का मतलब मतदाता सूची फ्रीज होना नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट

Published: Sat, 31 Oct 2026 09:02 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा होने का मतलब मतदाता सूची का फ्रीज होना ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर (फाइल)।

सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर (फाइल)।

HighLights

  1. SIR पूरा होने पर मतदाता सूची फ्रीज नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण।

  2. हटाए गए नाम चुनाव नामांकन तक दोबारा जोड़े जा सकते हैं।

  3. चुनाव आयोग को गड़बड़ियों पर जवाब देने का निर्देश दिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची को 'फ्रीज'(नए अपडेट पर रोक) कर दिया गया है। सु्प्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुछ राज्यों में एसआइआर की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये कहा।

केरल, छ्त्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में एसआइआर (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।

हटे नाम दुबारा जोड़े जा सकेंगे

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की बेंच के फैसले से ये साफ हो गया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटे नाम दुबारा जोड़े जा सकते हैं। इससे लाखों लोगों को वोट डालने के अधिकार से वंचित होने से रोका जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि समय बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

चुनाव में नामांकन दाखिल होने तक जोड़े जा सकते हैं नाम

वरिष्ठ वकील डी. एस. नायडू ने बताया कि लोग एसआइआर के बाद भी अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल होने तक नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' स्वीकार करने में गड़बड़ी की थी।

दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुधार के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वे चुनाव आयोग के सामने गड़बड़ियों को उठा सकते हैं।

केरल में एसआइआर का काम फरवरी में पूरा

चुनाव आयोग ने बताया कि केरल में एसआइआर का काम फरवरी में पूरा हो गया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में इसी मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया गया था। वकील जी. प्रकाश के माध्यम से सीपीएम (CPM) ने कहा कि अभी भी 24 लाख मतदाता सूची से बाहर हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीपीएम से उन मतदाताओं की डिटेल की मांग की जो वक्त की कमी की वजह से अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे। ये मांग इसलिए की गई है की ताकि चुनाव आयोग इन मामलों की जांच कर सके। इसके बाद आयोग को जो भी सुधार की जरूरत महसूस हो वो कदम उठा सके।

चुनाव आयोग से मांगा जवाब

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि केरल में एसआइआर (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने प्रक्रिया पूरी हो जाने के बावजूद चुनाव आयोग से एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने की मांग की। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से इस याचिका और रामचंद्रन के नोट, दोनों पर जवाब देने को कहा है।

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