NEET Paper Leak: 10 लाख रुपये में खरीदा नीट का पेपर, फिर भी आए 720 में से 107 नंबर
नीट पेपर लीक मामले में पकड़े गए आरोपी ने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में लीक हुआ पेपर खरीदा ...और पढ़ें
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10 लाख रुपये में मिले 107 नंबर

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट 2026 पेपर लीक मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच में राजस्थान का सीकर जिला कड़ी निगरानी में आ गया है। एजेंसी ने इस मामले में सीकर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में पकड़े गए एक आरोपी ने अपने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा, लेकिन इसके बाद भी उसका बेटा पेपर में पास होने लायक नंबर भी नहीं ला पाया।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने 'गेस पेपर' हासिल किया था जो NEET के प्रश्न पत्र से काफी मिलता-जुलता था और उसे कोचिंग सेंटरों तक पहुंचाया गया। यहीं से इस पेपर को देशभर में लीक किया गया।
10 लाख रुपये में मिले 107 अंक
नीट पेपर लीक मामले में सीकर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। तीनों व्यक्ति दिनेश बीवाल, उसका भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल का सबसे बड़ा बेटा विकास एक ही परिवार से हैं। CBI आरोपी दिनेश बीवाल के बेटे ऋषि बीवाल की भी तलाशी कर रही है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, दिनेश बीवाल ने अपने बेटे के लिए लीक हुआ पेपर हासिल करने के लिए सीकर में लगभग 10 लाख रुपये दिए थे। पहले से पेपर मिलने के बावजूद, ऋषि ने NEET में 720 में से केवल 107 अंक ही हासिल किए। अधिकारियों ने बताया कि ऋषि फिलहाल फरार है।
पूछताछ के दौरान दिनेश ने यह स्वीकार किया है कि उसने अपने बेटे ऋषि के लिए ही वह पेपर हासिल किया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि ऋषि ने बोर्ड परीक्षाओं में भी काफी खराब प्रदर्शन किया था।
10th और 12th में खराब नंबर के बावजूद NEET का पेपर
ऋषि ने 10वीं कक्षा लगभग 44 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी और 12वीं कक्षा में उसे सेकंड डिवीजन मिली थी। यहां तक कि उसे 12वीं पास होने के लिए ग्रेस मार्क्स मिले थे।
ऋषि की मार्कशीट से पता चलता है कि उसने 500 में से 254 अंक हासिल किए थे। विषयवार देखें तो, उसने हिंदी में 32, अंग्रेजी में 51, फिजिक्स में 51, केमिस्ट्री में 58 और बायोलॉजी में 62 अंक हासिल किए थे। 10th और 12th में खराब नंबर के बावजूद परिवार ने ऋषि को मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार किया।
अधिकारियों ने सीकर में एक फ्लैट की भी पहचान की है, जिसका इस्तेमाल पेपर बांटने और उम्मीदवारों के साथ बातचीत का इंतजाम करने के लिए एक कोऑर्डिनेशन सेंटर के तौर पर किया जा रहा था।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क के कुछ सदस्यों ने गेस पेपर को खुद जाकर उम्मीदवारों तक पहुंचाया। दिनेश बिवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर ऐसी भूमिका निभाने का शक है।
खबरों के मुताबिक, CBI ने करीब 150 ऐसे छात्रों की पहचान की है, जिनका इस नेटवर्क से जुड़ाव हो सकता है और जो फिलहाल जांच के दायरे में हैं।
(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)
