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'घरेलू विवाद में सिर्फ मूकदर्शक रहने पर ससुराल वालों पर नहीं चलेगा क्रूरता का केस', SC का बड़ा फैसला

Published: Wed, 27 May 2026 10:29 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के विवाद में ससुराल पक्ष की चुप्पी या बहू की मदद न करना ...और पढ़ें

पति-पत्नी के झगड़े में हस्तक्षेप न करना अपराध नहीं- सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

पति-पत्नी के झगड़े में हस्तक्षेप न करना अपराध नहीं- सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के विवाद में ससुराल पक्ष के लोग सिर्फ मूक दर्शक बने रहें या बहू की मदद के लिए आगे न आएं, तो केवल इसी आधार पर उनके खिलाफ क्रूरता या दहेज मांगने का मामला नहीं चलाया जा सकता।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन के सिंह की पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति का ऐसा व्यवहार नैतिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन इसे सीधे आपराधिक जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि केवल सामान्य और बिना ठोस आरोपों के आधार पर पति के पूरे परिवार के खिलाफ आपराधिक कानून लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, यह जरूरी है कि किसी व्यक्ति पर क्रूरता, उत्पीड़न या दहेज मांगने में सक्रिय भूमिका निभाने के स्पष्ट आरोप हों।

'सिर्फ समर्थन करने का आरोप काफी नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर परिवार के सदस्यों पर सिर्फ यह आरोप हो कि उन्होंने पति का समर्थन किया, विवाद में दखल नहीं दिया या महिला को समझौता करने की सलाह दी, तो इससे अपने आप आपराधिक मामला नहीं बन जाता।

कोर्ट ने माना कि कई बार रिश्तेदार विवाद के दौरान चुप रहते हैं या महिला की मदद नहीं करते, लेकिन जब तक उनके खिलाफ सक्रिय साजिश या अपराध में शामिल होने के ठोस सबूत न हों, तब तक उन्हें आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के गुना की एक महिला के मामले में आई, जिसमें महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल पक्ष के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी, क्योंकि उनके खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं थे।

अदालत ने सावधानी बरतने की दी सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असफल वैवाहिक रिश्ते में महिला की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन अदालतों को ऐसे मामलों में आरोपों की सावधानी से जांच करनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अक्सर भावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं और रिश्तों में तनाव रहता है। ऐसे मामलों में कई बार पति के साथ-साथ पूरे परिवार को भी आरोपी बना दिया जाता है, जबकि उनका विवाद में बहुत कम या कोई सीधा रोल नहीं होता।

अदालत ने साफ कहा कि किसी रिश्तेदार के खिलाफ कार्रवाई तभी होनी चाहिए, जब उसके खिलाफ क्रूरता, उत्पीड़न या दहेज मांगने में सीधे शामिल होने के स्पष्ट आरोप और सबूत मौजूद हों।

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