बेंगलूर। पैराशूट मुख्यमंत्रियों के लिए पहचानी जाने वाली कांग्रेस ने कर्नाटक में परंपराओं को तोड़ते हुए पहली बार गुप्त मतदान के जरिये विधायक दल का नेता चुना। गुप्त मतदान में मैसूर के प्रभावशाली नेता सिद्दरमैया को राज्य की कमान सौंपने पर सहमति बनी। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाले चार सदस्यीय केंद्रीय पर्यवेक्षक दल की बैठक के महज चार घंटे के भीतर यह फैसला किया। यह पार्टी द्वारा किसी राज्य में नेता चुने जाने के लिए लिया गया अब तक का सबसे कम समय है। कांग्रेस ने राज्यपाल एचआर भारद्वाज से सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह किया है।

पढ़ें: दो सौ से अधिक करोड़पति

फैसले से पहले हुई बैठक में 64 वर्षीय दलित नेता सिद्दरमैया ने एक प्रस्ताव के जरिये मुख्यमंत्री पद के लिए नाम चुनने का फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ने की अपील की थी। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने निर्वाचित विधायकों से गुप्त मतदान में अपनी इच्छा लिखने को कहा।

मतदान के बाद एंटनी ने राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष रहे सिद्दरमैया को कांग्रेस विधायक दल का नेता घोषित किया। कर्नाटक के सीएम पद के लिए सिद्दरमैया का सीधा मुकाबला केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री मंत्री एम. मल्लिकार्जुन खड़गे से था। घोषणा के बाद राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष जी. परमेश्वर व महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को विधायक दल के फैसले की जानकारी दी और सिद्दरमैया को सरकार बनाने का निमंत्रण देने का आग्रह किया। परमेश्वर ने संकेत दिए कि फिलहाल केवल सिद्दरमैया ही शपथ लेंगे। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव संभावित मंत्रियों की सूची के साथ दिल्ली में पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे।

गौरतलब है कि खुद परमेश्वर भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, लेकिन चुनाव में उनकी हार ने उन्हें दौड़ से बाहर कर दिया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सिद्दरमैया ने कहा कि उनका चयन सर्वसम्मति से किया गया है। गुप्त मतदान के सवाल पर उन्होंने कहा, 'विधायकों से मौखिक के बजाय अपनी पसंद लिखित में देने को कहा गया था और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। मतदान के बाद कांग्रेस सुप्रीमो से चर्चा कर एंटनी ने मेरे नाम की घोषणा कर दी।'

सिद्धरमैया की राजनीतिक यात्रा

-मैसूर के प्रभावशाली नेता 2006 में जद [एस] से निकलकर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

-कुरुबा यानी गड़रिया समुदाय के सिद्दरमैया को पिछड़े वर्गो के कद्दावर नेता के रूप में जाना जाता है।

-12 अगस्त 1948 को जन्मे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री ने 30 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा।

-राजनीति में आने के पहले वकालत की और शिक्षक भी रहे।

-पहला चुनाव 1978 में मैसूर तालुका बोर्ड सदस्य के लिए भारतीय लोकदल के टिकट पर लड़ा।

-1983 में पहली बार विधायक बने। 1985 में फिर चुनाव लड़े और जीतकर रामकृष्ण हेगड़े की जनता पार्टी सरकार में मंत्री बने।

-1989 में पहली बार हारे। 1994 में फिर मंत्री पद हाथ लगा।

-1996 में जेएच पटेल सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। जनता पार्टी में टूट के बाद देवेगौड़ा के साथ गए।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप