मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। न्यूयार्क के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तर्ज पर मुंबई के समंदर में शिवाजी का विशालकाय स्मारक बनेगा। पर्यटकों के लिए जहां यह एक बड़ा आकर्षण होगा, वहीं कांग्रेस के लिए मराठा वोट बैंक लुभाने का साधन।

मुंबई के मरीन ड्राइव से 4.5 किमी अंदर समुद्र में स्थित 18 एकड़ की चट्टान पर छत्रपति शिवाजी महाराज की विशाल अश्वारूढ़ प्रतिमा लगाकर यह स्मारक बनाने की योजना है। सरकार इसके लिए इतना जल्दी में है कि समुद्र में काम करने वाली दो विशेषज्ञ कंपनियों को 10 जनवरी तक सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद हफ्ते भर में ही इस योजना को मंजूरी मिलने की संभावना है। समुद्र में शिवाजी का स्मारक बनाने की योजना दिवंगत विलासराव देशमुख के पहले मुख्यमंत्रित्वकाल से ही चर्चा में आती रही है, लेकिन चुनाव से कुछ दिन पहले इस पर चर्चा कर इस मुद्दे को पुन: ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता था। अब मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने इस योजना को पूरा करने का बीड़ा उठाया है।

माना जा रहा है कि वह इस स्मारक के निर्माण की शुरुआत अपने कार्यकाल में करके राष्ट्रवादी कांग्रेस के मराठा वोट बैंक में सेंध लगाना चाहते हैं। दरअसल, मराठों का बड़ा वर्ग फिलहाल राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का समर्थक माना जाता है। इससे पहले चह्वाण की ही पहल पर पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह में दादर स्थित इंदू मिल की 12.5 एकड़ जमीन बाबा साहब अंबेडकर का स्मारक बनाने के लिए एवं 15 दिन पहले ही कोल्हापुर में एक मिल की 23 एकड़ भूमि छत्रपति शाहूजी महाराज का स्मारक बनाने के लिए दे चुकी है। अंबेडकर के साथ दलितों की आस्था जुड़ी है, तो शिवाजी के नौवें वंशह शाहूजी महाराज के साथ मराठों एवं दलितों दोनों की। राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि पृथ्वीराज चह्वाण स्मारकों का खेल खेलकर राकांपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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