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'व्हाट्सएप पर बूमर्स को बैन करो', बेटे ईशान की मांग पर शशि थरूर ने दिया सॉलिड जवाब

Published: Sun, 26 Jul 2026 05:33 PM (IST)Updated: Sun, 26 Jul 2026 06:05 PM (IST)

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने बेटे ईशान थरूर के सोशल मीडिया पर 'बूमर्स' को बैन करने के सुझाव पर मजेदार जवाब दिया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और बेटा ईशान थरूर(फोटो: सोशल मीडिया)

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और बेटा ईशान थरूर(फोटो: सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अपने तीखे तंज और हाजिरजवाबी के लिए पहचाने जाने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया है। इस बार उनका यह मजेदार जवाब किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के लिए नहीं, बल्कि उनके अपने बेटे ईशान थरूर के लिए था।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जोहो के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ श्रीधर वेंबू ने भारत में छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया।

इस पर सहमति जताते हुए ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया पर बिल्कुल नहीं होना चाहिए। लेकिन भारत को कुछ भी और करने से पहले व्हाट्सएप पर बूमर्स को बैन करने की जरूरत है।

शशि थरूर का चुटीला पलटवार

ईशान के इस पोस्ट पर तुरंत चुटकी लेते हुए शशि थरूर ने अपने बेटे को जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि बेटे, अगर हम भारत में बच्चों के जन्म के पैटर्न को देखें, तो पश्चिम के विपरीत, भारतीयों की हर पीढ़ी जिसमें तुम्हारी पीढ़ी भी बूमर की श्रेणी में ही आती है!

शशि थरूर का यह जवाब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और लोग उनके इस सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ करने लगे।

आखिर क्या है बूमर का मतलब?

आधिकारिक तौर पर बेबी बूमर शब्द का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1964 के बीच जन्मे लोगों के लिए किया जाता है।

हालांकि, भारत और इंटरनेट की दुनिया में बूमर शब्द का इस्तेमाल स्लैंग के रूप में उन बुजुर्गों या वरिष्ठ लोगों के लिए किया जाता है, जिनकी सोच थोड़ी पारंपरिक होती है या जो सोशल मीडिया पर बिन मांगी सलाह और ज्ञान बांटते हैं।

कहां से शुरू हुई यह पूरी बहस?

यह बहस तब शुरू हुई जब श्रीधर वेंबू ने फ्रांस की संसद द्वारा पारित एक ऐतिहासिक कानून का जिक्र किया। फ्रांस यूरोपीय संघ (ईयू) का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। वहां स्कूलों के परिसरों के भीतर भी मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

फ्रांस के इस कदम की तारीफ करते हुए श्रीधर वेंबू ने लिखा था कि भारत को भी छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर देना चाहिए। मेरा मानना है कि बच्चों को कागजी किताबें पढ़नी चाहिए, सूरज की रोशनी में मिट्टी में खेलना चाहिए और मोबाइल स्क्रीन से दूर रहना चाहिए।

वेंबू के इस सुझाव पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने बच्चों को स्क्रीन की लत से बचाने के लिए उनके इस विचार का पुरजोर समर्थन किया, वहीं कुछ अन्य यूजर्स का मानना था कि सरकार को नागरिकों और उनके बच्चों के निजी जीवन में इस हद तक दखल देने की जरूरत नहीं है।

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