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'यह एक नौकरशाही कार्रवाई है...', मणिपुर में इंटरनेट बैन पर शशि थरूर ने भाजपा सरकार को घेरा

Shashi Tharoor Tweet Over Manipur Internet Ban कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मणिपुर में लंबे समय से लगे इंटरनेट प्रतिबंध को लेकर ट्वीट शेयर किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी रिकॉर्ड में ऐसा नहीं आया है कि इंटरनेट बंद करने से हिंसा रुक जाती है या इस पर कोई असर पड़ता है। यह एक नौकरशाही कार्रवाई है जिससे लोगों की सुरक्षा नहीं होती है बल्कि केवल असुविधा होती है।

By Shalini KumariEdited By: Shalini KumariSun, 16 Jul 2023 12:42 PM (IST)
मणिपुर में इंटरनेट बैन को लेकर शशि थरूर ने दी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को मणिपुर हिंसा के कारण इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर केंद्र और मणिपुर सरकार को घेरा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह अजीब है कि भारत दुनिया का एकमात्र लोकतंत्र है, जो नियमित रूप से लंबे समय तक इंटरनेट शटडाउन कर देता है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा होती है।

पिछले दो महीने से जातीय हिंसा का गढ़ रहे मणिपुर पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले कांग्रेस नेता ने यह ट्वीट किया।

थरूर ने ट्वीट कर विपक्ष को घेरा

शशि थरूर सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्टैंडिंग के अध्यक्ष थे, उन्होंने कहा कि 2022 में समिति ने पाया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इंटरनेट शटडाउन वास्तव में हिंसा को रोकता है।

थरूर ने अपने ट्वीट में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मणिपुर उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें पिछले तीन महीनों से राज्य में डिजिटल जीवन को बाधित करने वाले इंटरनेट पर कठोर प्रतिबंध में ढील दी गई है। सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने 2022 में तीखी टिप्पणी की थी कि सरकार द्वारा ऐसा कोई औचित्य प्रदान नहीं किया गया है, जो किसी भी तरह से प्रदर्शित करता हो कि इंटरनेट शटडाउन वास्तव में बाधा डालता है, कहीं भी हिंसा या आतंकवाद को रोकना तो दूर की बात है।"

थरूर ने लिखा, "यह एक प्रतिक्रियाशील नौकरशाही कार्रवाई है, जो आम नागरिकों को एक उपयोगी सुरक्षा उपाय की तुलना में कहीं अधिक असुविधा का कारण बनती है। यह विचित्र है कि भारत दुनिया का एकमात्र लोकतंत्र है, जो नियमित रूप से लंबे समय तक इंटरनेट शटडाउन का सहारा लेता है, जिसका हिंसा पर कोई सराहनीय प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन इससे आम नागरिकों को काफी असुविधा होती है।"

उन्होंने आगे लिखा, "मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उन बाबुओं के बजाय नागरिकों के अधिकारों के लिए खड़ा होगा जो बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड लेनदेन, नामांकन, परीक्षाओं और सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करने वाले नागरिकों पर अपने निर्णय थोपते हैं। न्यायालय को अब इस प्रथा को समाप्त करना चाहिए।"

मई की शुरुआत से जारी है हिंसा

मणिपुर उच्च न्यायालय ने 7 जुलाई को राज्य में इंटरनेट पर प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया, जिसके खिलाफ राज्य सरकार शीर्ष अदालत में चली गई। राज्य में कुकू और मैतेई समुदायों के बीच झड़पों के कारण 3 मई से हिंसा देखी जा रही है। अब तक इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। राज्य और केंद्र सरकार इस हिंसा को पूरी तरह से खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

विपक्ष बना रही दबाव

कांग्रेस पीएम मोदी पर मणिपुर मुद्दे पर बोलने का दबाव बना रही है। शनिवार को कांग्रेस ने कहा कि वह 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में मणिपुर की स्थिति पर चर्चा करेगी। कई बार विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को घेरा है।

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मणिपुर उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें पिछले तीन महीनों से राज्य में डिजिटल जीवन को बाधित करने वाले इंटरनेट पर कठोर प्रतिबंध में ढील दी गई है।

सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने 2022 में तीखी टिप्पणी की थी कि सरकार द्वारा ऐसा कोई औचित्य प्रदान नहीं किया गया है, जो किसी भी तरह से प्रदर्शित करता हो कि इंटरनेट शटडाउन वास्तव में बाधा डालता है, कहीं भी हिंसा या आतंकवाद को रोकना तो दूर की बात है।"