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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 17, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पूर्वोत्तर की खूबसूरत वादियों तक पहुंचा वायु प्रदूषण का साया, CSE ने दी ये चेतावनी

By TilakrajEdited By:
Published: Fri, 17 Dec 2021 05:13 PM (IST)

CSE की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रिसर्च एंड एडवोकेसी अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक उत्तर भारत में खास तौर पर गंगा किनारे ...और पढ़ें

पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी सबसे प्रदूषित शहर
पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी सबसे प्रदूषित शहर

नई दिल्ली, अनुराग मिश्र/विवेक तिवारी। वायु पदूषण की समस्या से दिल्ली और घनी शहरी आबादी वाले शहर तो जूझ रही रहे थे, लेकिन इस प्रदूषण का असर अब हरे भरे और जंगलों भरपूर पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट (CSE) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्यों में वायु प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ते वायु प्रदूषण का असर पूर्वोत्तर राज्यों के खुले आसमान और साफ हवा पर दिखने लगा है।

CSE की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रिसर्च एंड एडवोकेसी अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक उत्तर भारत में, खास तौर पर गंगा किनारे के मैदानों में गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या सर्दियां शुरू होते ही शुरू हो जाती है। लेकिन ये समस्या अब पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच रही है। पूर्वोत्तर राज्यों के कई बड़े शहरों में खास तौर पर राज्यों की राजधानियों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। सर्दियां शुरू होने के साथ ही वहां कई शहरों में स्मॉग की समस्या देखी जा रही है।

सीएसई के अर्बन लैब के प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी के मुताबिक, 'वायु गुणवत्ता डेटा में अंतराल और डेटा के गुणवत्ता नियंत्रण की कमी से इन शहरों के लिए वायु प्रदूषण का विश्वसनीय डेटा तैयार करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, ये साफ है कि इस क्षेत्र में हवा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में सर्दियों में, गुवाहाटी जैसे शहरों की वायु गुणवत्ता लगभग उतनी ही खराब हो सकती है जितनी हम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और उत्तर प्रदेश के शहरों में देखते हैं। अगरतला और कोहिमा जैसे छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण पिछले कुछ सालों की तुलना में कहीं ज्यादा है।

सीएसई रख रहा प्रदूषण पर नजर

सीएसई ने असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों में शहरी वायु गुणवत्ता की स्थिति का विश्लेषण किया है। यह सीएसई की अर्बन डेटा एनालिटिक्स लैब की वायु गुणवत्ता ट्रैकर पहल का हिस्सा है, जिसे पिछली सर्दियों में शुरू किया गया था। इस नए विश्लेषण का उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख शहरों में सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण की गंभीरता और प्रवृत्ति को समझना है।

सीएसई की ओर से 1 जनवरी, 2019 से 7 दिसंबर, 2021 के बीच पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ते PM2.5 का वार्षिक और मौसम में बदलाव के आधार पर आकलन किया गया है। यह विश्लेषण पूर्वोत्तर में वर्तमान में कार्यरत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों से उपलब्ध वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित है। यूएसईपीए (यूनाइटेड स्टेट्स एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी) पद्धति के आधार पर बड़ी मात्रा में इकट्ठा किए गए आंकड़ों के आधार पर परिणाम तैयार किए गए हैं। इस विश्लेषण में सात निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) शामिल हैं, जो समान संख्या में राज्यों में छह शहरों में फैले हुए हैं- गुवाहाटी (असम) में दो स्टेशन और शिलांग (मेघालय), अगरतला (त्रिपुरा), कोहिमा (नागालैंड) में एक-एक स्टेशन। आइजोल (मिजोरम) और नाहरलगुन (अरुणाचल प्रदेश) में एक एक स्टेशन। मणिपुर और सिक्किम में रियल टाइम मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है, इसके चलते यहां फिलहाल प्रदूषण का सही आंकलन कर पाना मुश्किल हो रहा है।

पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी सबसे प्रदूषित शहर: 2021 में (30 नवंबर तक) औसत PM2.5 स्तर पहले ही गुवाहाटी में 2019 के वार्षिक औसत को पार कर चुका है। शहर का 2020 का वार्षिक औसत 2019 के औसत से भी अधिक था जो शहर में हवा के लगातार खराब होने का संकेत देता है। शिलांग इस क्षेत्र का एकमात्र शहर है, जहां दो साल से अधिक समय से डेटा जनरेट करने वाला स्टेशन है, लेकिन खराब डेटा उपलब्धता के कारण इसके वार्षिक औसत को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता है। फिर भी, शहर का औसत वार्षिक मानक से काफी नीचे है।

अगरतला 2020 के औसत 45 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (ug/m3) के साथ इस क्षेत्र का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है। 2020 के औसत 35 ug/m3 के साथ कोहिमा इस क्षेत्र का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। आइज़वाल और नाहरलागुन न्यूनतम डेटा उपलब्धता आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं, लेकिन उपलब्ध सीमित डेटा इंगित करता है कि ये दोनों संभवतः वार्षिक मानक को पूरा करेंगे।