नई दिल्ली, रायटर्स। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रशासन के इनकार करने के बावजूद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बनी बीबीसी की विवादित डाक्युमेंट्री दिखाने की घोषणा की थी, लेकिन स्क्रीनिंग से पहले ही बिजली काट दी गई और इंटरनेट भी बंद कर दिया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर के अंदर छात्रों में पत्थरबाजी हुई। जिससे कई छात्रों को चोट पहुंची और छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को सरकार ने बताया दुष्प्रचार

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के महासचिव ने बुधवार को बताया कि प्रत्येक राज्य में डॉक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' दिखाई जाएगी। मालूम हो कि बीबीसी की इस डॉक्युमेंट्री में 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। बीबीसी की डॉक्युमेंट्री को सरकार ने दुष्प्रचार बताया है और भारत में सोशल मीडिया पर किसी भी क्लिप को दिखाने और शेयर करने पर रोक लगा दी है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के छात्र संगठन एसएफआई के महासचिव मयूख बिस्वास ने कहा देश में अघोषित आपातकाल लगाए जाने के बावजूद, सरकार हमारी विरोध की आवाज को दबाई नहीं जा सकती है।

गुजरात दंगे में मोदी को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट

बता दें कि फरवरी 2002 में कारसेवकों से भरी ट्रेन को गोधरा में जलाए जाने के बाद 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे राज्य में दंगे भड़क उठे थे। इस दंगे में 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने दंगे रोकने में ढिलाई बरतने के आरोपों से इनकार किया है और 2012 में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हुई जांच के बाद उन्हें निर्दोष पाया गया। पीएम मोदी को क्लीन चिट पर सवाल उठाने वाली याचिका पिछले वर्ष खारिज कर दी गई थी। बीबीसी ने कहा है कि यह डॉक्युमेंट्री कड़े शोध के बाद तैयार की गई है और इसमें भाजपा से जुड़े नेताओं की राय भी शामिल की गई है।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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