नीलू रंजन, नई दिल्ली। भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाने के अलकायदा के मंसूबे को गहरा धक्का लगा है। एक तरफ भारत में अलकायदा पैर जमाने में पूरी तरह विफल रहा, तो दूसरी ओर अफगानिस्तान में उसके भारतीय उपमहाद्वीप के प्रमुख असीम उमर का डिप्टी उमर खेताब मारा गया है। ध्यान देने की बात है अलकायदा प्रमुख अलजवाहिरी ने सितंबर 2014 में असीम उमर को भारतीय उपमहाद्वीप का अमीर नियुक्त किया था।

अफगानिस्तान के नेशनल डायरेक्टोरेट आफ डिफेंस (एनडीएस) की ओर जारी बयान के अनुसार नाटो और अफगान सेना की कार्रवाई में उमर खेताब समेत अलकायदा से 80 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। भारतीय सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उमर खेताब की मौत से अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाने की कोशिशों को गहरा धक्का लगा है।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां भारत में अलकायदा को पैर जमाने से रोकने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि अल जवाहिरी ने तीन साल पहले भारत में अलकायदा की शाखा खोलने की घोषणा की थी और इसके लिए असीम उमर को अमीर भी नियुक्त कर दिया था। लेकिन दावे के साथ कहा जा सकता है कि तीन साल बाद भी भारत में अलकायदा का कोई माड्यूल सक्रिय नहीं है।

अलकायदा की गतिविधियों पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब तक अलकायदा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तबतक इसके खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है। आइएसआइएस के कारण अफगानिस्तान-पाकिस्तान तक सिमट चुका अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाने की लगातार कोशिश कर रहा है। कश्मीर में जाकिर मुसा के रूप में उन्हें एक आतंकी भी मिल गया है। अलकायदा ने जाकिर मुसा को कश्मीर में अलकायदा का प्रमुख भी घोषित कर दिया था। बताया जाता है कि असीम उमर की ओर से उसका डिप्टी उमर खेताब की भारत में गतिविधियों की देख-रेख कर रहा था।

गौरतलब है कि अल जवाहिरी ने सितंबर 2014 में अलकायदा के भारत में शाखा खोलने की घोषणा करते हुए अल जवाहिरी ने कहा था कि भारत मुस्लिम साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था और यहां नए सिरे से इस्लामिक राज की वापसी की जाएगी। उसका दावा था कि जल्द ही अलकायदा ब्रिटिश साम्राज्य के समय खींची गई कृत्रिम सीमाओं को ध्वस्त कर देगा, जो मुसलमानों को अलग-अलग देशों में बांटती हैं। अलकायदा ने भारतीय शाखा का नाम 'कायदात अल जिहाद' नाम दिया था।

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Posted By: Gunateet Ojha

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