बिलासपुर, जेएनएन। चावल खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी को दूर भगाया जा सकता है, जल्‍द ही यह बात साबित हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में उत्पादित धान की 12 पुरानी प्रजातियों में से तीन में कैंसर रोधक गुणों का पता चला है। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विज्ञानी डॉ. सुनील नायर के नेतृत्व में हुए शोध के बाद मिले प्रारंभिक नतीजों के आधार पर चावल के सैंपल भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई को परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।

कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के गुण वाली चावल की ये तीन प्रजातियां लावाचा, गठुवन व महाराजी है। अगले 15 दिनों में रिपोर्ट आने की उम्मीद की जा रही है। विज्ञानी डॉ.नायर का कहना है कि रिसर्च सेंटर अब अंतिम परीक्षण की तैयारी कर रहा है, जिसमें सेवन के तरीके के अलावा मात्रा सहित दूसरी अन्य जरूरी बातों का भी उल्लेख किया जा सकता है। प्रदेश में उपलब्ध धान की अनेक प्रजातियों में कई औषधीय गुण हैं।

शोध कर रहे विज्ञानियों ने पहली बार चावल की तीन प्रजातियों में कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने की क्षमता का पता लगाया है। विज्ञानियों ने प्राथमिक चरण में धान की 12 प्रजातियों को कैंसर रोधक गुणों की खोज के लिए चिह्नित किया था। सभी प्रजातियों पर एक-एक अनुसंधान शुरू हुआ। धान की तीन प्रजातियों में मिले गुणों के बाद इस पर गहन अध्ययन शुरू हुआ। दो वर्ष के अनुसंधान के बाद विज्ञानियों ने धान की तीन प्रजातियों में मिले कैंसर रोधक गुण पाया है।

इसके लिए असर कारक

अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि गठुवन चावल में मौजूद तत्वों से कैंसर रोगियों को जोड़ों के असहनीय दर्द में राहत मिलेगी। लावाचा व महराजी चावल के उपयोग से कीमोथैरेपी के बाद होने वाली असहनीय दर्द और साइड इफैक्ट से राहत मिलेगी। दरअसल, कैंसर के मरीज को कीमोथेरेपी के बाद भी काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में चावल की ये किस्‍में मरीज को कुछ राहत पहुंचा सकें, तो बहुत अच्‍छा है।

Posted By: Tilak Raj

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