जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट में हुए नए म्यूटेशन को लेकर वैज्ञानिक सतर्क हो गए हैं। यह म्यूटेशन डेल्टा के स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) में हुआ है। आरबीडी में म्यूटेशन के कारण इसके ज्यादा संक्रामक होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल इसके ठोस सुबूत नहीं मिले हैं। आरबीडी इंसान के शरीर में जाकर कोशिकाओं से चिपक जाता है और व्यक्ति को संक्रमित करता है।

दुनिया भर में कोरोना वायरस के रोज नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी डेल्टा वैरिएंट में हुए म्यूटेशन यानी बदलाव पर फिलहाल चर्चा से बच रहे हैं। परंतु, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के रोज नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। इनमें से कौन सा वैरिएंट ज्यादा संक्रामक होगा, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर 127 मामले मिले, इनमें भारत के छह केस शामिल

डेल्टा वैरिएंट में नए म्यूटेशन को डेल्टा प्लस कहा जा रहा है, हालांकि यह कोई आधिकारिक नाम नहीं है। पूरी दुनिया में डेल्टा प्लस के 127 मामले मिले हैं, जिनमें भारत के छह मामले भी शामिल हैं।

डेल्टा वैरिएंट में नए म्यूटेशन को लेकर विज्ञानी सतर्क

अधिकारी ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस में हो रहे म्यूटेशन पर पूरी दुनिया के विज्ञानियों की नजर है और इसी क्रम में इसकी पहचान की गई है। नए म्यूटेशन से डेल्टा के और भी अधिक संक्रामक होने की आशंका की जांच की जा रही है। ध्यान देने की बात है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए मुख्यतौर पर डेल्टा वैरिएंट को ही जिम्मेदार माना जाता है।

मोनोक्लोनल एंटीबाडी के प्रभावी नहीं होने पर जताई चिंता

दरअसल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी के विज्ञानी डाॅ. विनोद सकारिया ने रविवार को ट्वीट कर डेल्टा वैरिएंट के नए म्यूटेशन के खिलाफ मोनोक्लोनल एंटीबाडी के प्रभावी नहीं होने पर चिंता जताई थी। इस संबंध में पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि फिलहाल इसके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए और डाटा की जरूरत होगी।