तिरुअनंतपुरम, जेएनएन। केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया जिसके अनुसार, मंदिर प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकारों को मान्यता दी गई है।तिरुअनंतपुरम के जिला जज की अध्यक्षता वाली कमेटी फिलहाल मंदिर की व्यवस्था देखेगी। कोर्ट ने त्रावणकोर शाही परिवार की अपील को स्वीकार कर लिया।

उल्लेखनीय है कि पद्मनाभस्वामी का मंदिर देश के सबसे धनी मंदिरों में से है। इसकी तिजोरियों से निकली करीब एक लाख करोड़ की संपत्ति और आभूषणों से यह चर्चा मे आया था। अभी इसकी एक तिजोरी यानी वाल्ट बी नही खुली है। सुप्रीम कोर्ट ने त्रावणकोर राज परिवार के सेवादारी अधिकार को मान्यता दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर के प्रबंधन के लिए बनने वाली मुख्य कमिटी में शाही परिवार की मुख्य भूमिका रहेगी। जब तक मुख्य कमिटी का गठन नहीं हो जाता, तब तक तिरुअनंतपुरम के जिला जज की अध्यक्षता वाली कमिटी मंदिर की व्यवस्था देखेगी।

जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की बेंच ने पिछले साल अप्रैल में मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। त्रावणकोर के शाही परिवार ने केरल हाईकोर्ट के 2011 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस फैसले में कोर्ट ने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और संपत्ति का राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने मंदिर के सभी तहखानों को खोलने का भी आदेश दिया था।

भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर

केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल है। इसके साथ ही इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्‍व भी है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर विष्णु भक्तों का महत्वपूर्ण आराधना स्थल है। 1733 में इस प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावणकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। इस मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी है, कहते हैं कि इसी स्थान पर विष्णु भगवान की प्रतिमा मिली थी, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण किया गया था।  

Posted By: Monika Minal

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