सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से पूछा- टोल प्लाजा पर कैमरे लगा हाईवे की निगरानी क्यों नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और वाहनों की पार्किंग पर चिंता जताई, NHAI से टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी प्रणाली लगाने को कहा।

टोल प्लाजा पर कैमरे लगा हाईवे की निगरानी क्यों नहीं की जा सकती।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे अतिक्रमण, पार्किंग पर चिंता जताई।
NHAI से टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी का सुझाव।
फलोदी दुर्घटना मामले में मंत्रालयों को समय दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण और गाड़ियां खड़ी करने के मुद्दे पर चिंता जताई और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से पूछा कि वे इससे निपटने के लिए टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी प्रणाली और निगरानी कक्ष क्यों नहीं स्थापित कर सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ राजस्थान के फलोदी इलाके में हुई एक दुर्घटना से जुड़े स्वत: संज्ञान वाले मामले पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में टेंपो ट्रैवलर एक खड़े ट्राले से टकरा गया था। पीठ ने कहा कि राजमार्ग पर अतिक्रमण और वाहनों का खड़ा होना दो बड़ी समस्याएं हैं।
NHAI की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्होंने राजमार्गों पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्ती के निर्देश जारी किए हैं। इस पर पीठ ने कहा-‘आप कैमरा निगरानी प्रणाली यानी सीसीटीवी लगाने के बारे में क्यों नहीं सोच सकते? आप सभी टोल प्लाजा पर मॉनीटरिंग रूम स्थापित कर सकते हैं।’
इस मामले में न्यायमित्र के रूप में शीर्ष अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि एक बड़ी समस्या हाईवे पर गाड़ियों की अवैध पार्किंग है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने अभी तक इस मामले में अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। उसने दोनों मंत्रालयों को अपने हलफनामे दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को तय की और कहा कि तमिलनाडु सरकार को सुनवाई की अगली तारीख से पहले हलफनामा दाखिल करे।
13 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें कहा गया कि कोई भारी या वाणिज्यिक वाहन किसी भी नेशनल हाईवे पर निर्धारित बे, ले-बाय या सड़क किनारे की सुविधा के अलावा रुक नहीं सकता या पार्क नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने किसी भी नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे (सड़क के लिए आरक्षित जमीन) के भीतर किसी भी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक इमारत के निर्माण/संचालन पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह भी पाया था कि नेशनल हाईवे भारत की कुल सड़क लंबाई का महज दो प्रतिशत हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में इनकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
