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'क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं', सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला केस में इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन की याचिका पर उठाए सवाल

Published: Tue, 05 May 2026 10:14 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर उठाए सवाल। (एएनआई)

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर उठाए सवाल। (एएनआई)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन की याचिका पर सवाल उठाए।

  2. अदालत ने पूछा, क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं।

  3. एसोसिएशन को वकीलों के कल्याण के लिए काम करने की सलाह दी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने के मामले में इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन के जनहित याचिका दाखिल करने पर बुधवार को सवाल उठाया और कड़ी टिप्पणियां भी कीं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एसोसिएशन की पैरोकारी कर रहे वकील से एसोसिएशन के जनहित याचिका दाखिल करने पर सवाल किया कि क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं।

शीर्ष अदालत का सवाल था कि क्या आप जैसी संस्था की कोई आस्था हो सकता है? यह तो किसी व्यक्ति की होती है। संस्था की अंतरात्मा नहीं होती। कोर्ट ने एसोसिएशन से कहा कि उसे ऐसी जनहित याचिका दाखिल करने के बजाए वकीलों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधानपीठ आजकल धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ भेदभाव के मुद्दे पर विचार कर रही है। इस मामले की शुरुआत केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के मामले से हुई थी।

मूल याचिका इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने दाखिल की थी जिस पर 2018 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दिए फैसले में प्रतिबंध को गलत ठहराया था। जिसके खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। इस मामले को नौ जजों की पीठ को विचार के लिए भेज दिया गया था जिसमें महिलाओं से धार्मिक स्थलों में भेदभाव के बारे में सात कानूनी सवाल विचार के लिए तय किये गए हैं।

सुनवाई पीठ की अगुवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं और पीठ के अन्य न्यायाधीश बी.वी नागरत्ना, एमएम सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, एजी मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर माधवन और जोयमाल्या बाग्ची हैं।

बुधवार को इंडियन यंग लायर्स एसोसिएसन की ओर से वकील रवि प्रकाश गुप्ता ने बहस करते हुए कहा कि जून 2006 में अखबार में चार लेख छपे थे। उन लेखों का विवरण दिया इस पर सीजेआई ने कहा ठीक है, तो क्या ये जनहित याचिका प्रेस रिपोर्ट पर आधारित है।

वकील ने कहा कि एसोसिएशन भगवान अयप्पा के भक्तों की आस्था को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि उसे कायम रख रहा है। जैसे ही वकील ने आगे दलीलें देना शुरू किया जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि आप जैसी कानूनी संस्था की कोई आस्था कैसे हो सकती है। वो तो किसी व्यक्ति की होती है। इस संस्था की तो अंतरात्मा नहीं होती।

अगला सवाल जस्टिस अरविंद कुमार का था उन्होंने पूछा कि क्या संस्था ने यह जनहित याचिका दाखिल करने के लिए कोई प्रस्ताव पारित किया था। क्या संस्था के अध्यक्ष ने उस पर हस्ताक्षर किये हैं। तभी सीजेआई ने सवाल किया कि आपने यह जनहित याचिका क्यों दायर की क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं। वकील ने कहा कि यह संगठन पंजीकृत संस्था है।

वकील ने फिर बहस आगे बढ़ाई लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की, क्या इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पास करने के लिए और कोई काम नहीं है। क्या वह वकीलों के कल्याण के लिए काम नहीं कर सकती।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वे वकीलों के लिए काम करें। युवा वकीलों के कल्याण के लिए काम करें। जो ग्रामीण इलाकों में संघर्ष कर रहे हैं उन्हें केस की बहस के लिए शहर आने में दिक्कत होती है। इसके बाद एक अन्य न्यायाधीश ने कहा कि वे अपनी बहस सात कानूनी सवालों पर करें। मामले में गुरुवार को भी बहस जारी रहेगी।

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