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'उन दोनों का एक बच्चा है, अब वह रेप का आरोप लगा रही हैं?', लिव-इन रिलेशनशिप पर SC की सख्त टिप्पणी

Published: Mon, 27 Apr 2026 01:49 PM (IST)Updated: Mon, 27 Apr 2026 02:43 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि, ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना आपराधिक जुर्म नहीं ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो।

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो।

HighLights

  1. लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर आना कोई अपराध नहीं

  2. आपसी सहमति वाले संबंध यौन अपराधों से स्पष्ट रूप से अलग

  3. लिव-इन से जन्मे बच्चों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि, ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना अपने आप में कोई आपराधिक जुर्म नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आपसी सहमति से बने रिश्तों और यौन अपराधों के बीच स्पष्ट अंतर समझना जरूरी है।

आपसी सहमति वाले रिश्ते और यौन अपराध अलग

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा करके रेप और मारपीट करने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब दो बालिग बिना शादी के साथ रहने का फैसला करते हैं, तो ऐसे रिश्तों में कुछ जोखिम भी होते हैं।

जस्टिस नागरत्ना ने आगे सवाल उठाया कि अगर रिश्ता आपसी सहमति से बना था, तो उसे बाद में आपराधिक मामले में कैसे बदला जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह के सवालों को अक्सर पीड़ित को शर्मिंदा करने के रूप में देखा जाता है, लेकिन उन्होंने सहमति की प्रकृति को समझने पर जोर दिया।

बच्चे के अधिकार सुरक्षित : सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने आगे कहा कि कई बार लिव-इन रिश्ते लंबे समय तक चलते हैं, लेकिन टूटने के बाद विवाद खड़े हो जाते हैं और शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं। मामले में महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने पीड़ित विधवा महिला से शादी का वादा किया और बच्चा भी पैदा किया था। जब वह पीड़िता से मिला था तब वह 18 साल की थी। इस दौरान उसने महिला को यह नहीं बताया कि, वह पहले से शादीशुदा है।

इस पर कोर्ट ने पूछा कि महिला ने शादी किए बिना ही उसके साथ रहने और बच्चा पैदा करने का फैसला क्यों किया। हालांकि, कोर्ट ने महिला के प्रति सहानुभूति भी जताई और कहा कि वह अपने बच्चे के लिए गुजारा-भत्ता मांग सकती है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि शादी के बाहर पैदा हुआ बच्चा नाजायज नहीं माना जा सकता और उसके अधिकार सुरक्षित हैं। अंत में कोर्ट ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि वे इस विवाद को आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की कोशिश करें।

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