SIR प्रक्रिया में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस; फॉर्म-6 पर क्यों मचा घमासान?
सुप्रीम कोर्ट ने SIR और फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। पीठ यह ...और पढ़ें

SC ने फॉर्म 6 और SIR प्रक्रिया में बदलाव पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वाले 'फॉर्म 6' में बिना तय वैधानिक प्रक्रिया के बदलाव करने और मतदाता सूची संशोधन (SIR) से जुड़े विवाद को लेकर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ यह जांच करेगी कि फॉर्म 6 में बदलाव की प्रक्रिया कानून के तहत अपनाई गई थी या नहीं। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की याचिकाकर्ताओं की मांग को खारिज कर दिया है। चलिए जानते हैं क्या है फार्म-6 को लेकर विवाद और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?
दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें आरोप लगाया गया है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से नहीं लिए गए।
याचिकाओं में विशेष रूप से चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी न होने की बात कही गई है, जिनका कई अवसरों पर चुनाव निकाय प्रमुख मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ मतभेद रहा था।
किसने दी थी फार्म-6 में बदलाव की मंजूरी?
याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि फॉर्म-6 में बदलाव को किसने मंजूरी दी थी? CJI ने कहा, "हमने किसी भी मॉडिफाइड फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। यह बात साफ होनी चाहिए। जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया है।"
चुनाव आयोग का दावा
बताते चलें कि इससे पहले पिछले हफ्ते चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 में शामिल किए गए नए घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी हासिल थी। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से यह अतिरिक्त शर्त जोड़ी गई थी।
हम उन निर्णयों पर रोक लगाएंगे - न्यायमूर्ति बागची
न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि वैधानिक ढांचे के खिलाफ कोई फैसला लिया गया है या नहीं, यह तय करने से पहले अदालत को संबंधित अधिकारियों के लिखित जवाब और आधिकारिक रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी।
न्यायमूर्ति बागची ने आगे कहा, "यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो हम ऐसे फैसलों पर रोक लगाएंगे और उन्हें अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित करेंगे। लेकिन क्या हम पहले ही बिना रिकॉर्ड देखे एकतरफा यह मान लें कि सभी फैसले मनमाने थे? हम आयोग से एक स्पष्ट और पारदर्शी जवाब की अपेक्षा करते हैं।"
फॉर्म 6 (Form 6) क्या है?
फॉर्म 6 वह आधिकारिक आवेदन पत्र है, जिसके माध्यम से कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करता है। इस फॉर्म में आवेदक का नाम, संबंधी (पिता/पति आदि) का विवरण, लिंग, जन्मतिथि, वर्तमान पता और पहचान/सत्यापन दस्तावेज की जानकारी देनी होती है।
दिशानिर्देशों में यह भी प्रावधान है कि यदि आवेदक को अपने निर्वाचन क्षेत्र का नाम या क्रमांक ज्ञात नहीं है, तो केवल इस आधार पर उसका आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता। यदि निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो मतदाता पंजीकरण अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा।
हालांकि, आवेदकों को एक घोषणा पत्र भी भरना होता है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि झूठा बयान देना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है। यह आवेदन आवेदक के सामान्य निवास क्षेत्र के मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) को भेजा किया जाता है।
फॉर्म 6 को लेकर क्या है विवाद ?
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' में कोई औपचारिक संशोधन किए बिना ही अपने सॉफ्टवेयर के जरिए फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त शर्तें जोड़ दी हैं। इसके तहत नए आवेदकों से उनके वंशज (पिता या दादा का विवरण) और पिछले एसआईआर से जुड़े संदर्भ मांगे जा रहे थे।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने प्रक्रियात्मक बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू का भी समर्थन मिला।
विवाद का मूल मुद्दा केवल मतदाताओं से मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग कानूनी और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल सॉफ्टवेयर में बदलाव करके चुनावी नियमों और फॉर्म-6 के प्रारूप को बदलकर एसआईआर से संबंधित आवश्यकताओं को लागू कर सकता है?
