नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जेबी पार्डीवाला ने फैसले देने वाले जजों पर निजी हमले किए जाने पर चेताते हुए कहा कि ऐसे देश एक 'खतरनाक परिदृश्य' की ओर जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्याय के निस्तारण की प्रक्रिया में डिजिटल मीडिया का ट्रायल बेवजह बाधक बनता है। इसके लिए देश में इंटरनेट मीडिया और निजी हितों के लिए इन मंचों पर आए दिन लक्ष्मणरेखा लांघी जा रही है।

भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का हिस्सा रहे जस्टिस जेबी पार्डीवाला ने कहा कि फैसला देने पर जजों पर निजी हमले होना एक घातक स्थिति है। ऐसी सूरत में जज कानून क्या कहता है के बजाय मीडिया क्या कहती है पर विचार करने लगते हैं।

इंटरनेट मीडिया और डिजिटल मीडिया में फैसलों की सकारात्मक आलोचना के बजाय मूल रूप से जजों के खिलाफ निजी राय अधिक जताई जाती है। इससे न्यायिक संस्थाओं को नुकसान हो रहा है और उनकी गरिमा को ठेस पहुंच रही है। फैसले में समाधान इंटरनेट मीडिया से नहीं बल्कि क्रम में उच्च अदालतों में मिलता है। जज कभी भी अपनी जबान से बात नहीं करते बल्कि वह अपने फैसलों से बात करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र को पूरी तरह से परिपक्व नहीं कहा जा सकता है। कानूनी और लोकतांत्रिक मुद्दों का विशुद्ध रूप से राजनीतिकरण करने के लिए इंटरनेट मीडिया का बेजा इस्तेमाल हो रहा है। संविधान के तहत कानून की सुरक्षा के लिए देश भर में डिजिटल और इंटरनेट मीडिया पर लगाम कसने की जरूरत है। डिजिटल मीडिया ने न्याय देने की प्रक्रिया में कई बार बाधा डाली है और लक्ष्मणरेखा बहुत बार लांघी है।

पीएम के 'ग्लोबल सोचें, लोकल करें' की तर्ज पर घरेलू हित न भूलें : जस्टिस

वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'ग्लोबल सोचें और लोकल करें' के वक्तव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए घरेलू हितों को भी कभी भुलाना नहीं चाहिए। उन्होंने रविवार को जस्टिस एचआर खन्ना के नेशनल सिंपोजियम 'मूलभूत दायित्व बनाम मूलभूत अधिकार' पर संबोधन के दौरान कहा कि अधिकारों की बात से पहले दायित्वों के निर्वाह की बात होनी चाहिए। जस्टिस नाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के के इस वक्तव्य से साफ है कि हमारा नजरिया पूरी तरह से वैश्विक हो, तो भी देश में अन्य लोगों के हितों और अधिकारों को भूलना नहीं चाहिए।

Edited By: Ashisha Rajput