विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CJI एसए बोबडे ने पूछा- क्या पर्यावरण मंत्री आ सकते हैं सुप्रीम कोर्ट, सॉलिसिटर जनरल ने जताई आपत्ति

By Manish PandeyEdited By:
Published: Wed, 19 Feb 2020 01:57 PM (IST)Updated: Wed, 19 Feb 2020 02:36 PM (IST)

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार की नीति से संबंधित मुद्दों पर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से चर्चा की बात कही है।

CJI एसए बोबडे ने पूछा- क्या पर्यावरण मंत्री आ सकते हैं सुप्रीम कोर्ट, सॉलिसिटर जनरल ने जताई आपत्ति
CJI एसए बोबडे ने पूछा- क्या पर्यावरण मंत्री आ सकते हैं सुप्रीम कोर्ट, सॉलिसिटर जनरल ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार की नीति से संबंधित मुद्दों पर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से चर्चा के लिए सहमती जताई है।

वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सभी सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने के मुद्दे से निपटने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ बातचीत करने की अपनी इच्छा व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी से पूछा कि क्या पर्यावरण मंत्री नितिन गडकरी अदालत से बातचीत करने के लिए आ सकते हैं। पीठ ने विधि अधिकारी से पूछा, 'क्या पर्यावरण मंत्री सर्वोच्च न्यायालय में आ सकते हैं और बिजली/ हाइड्रोजन पर चलने वाले गैर-प्रदूषणकारी वाहनों को पेश करने के प्रस्ताव की व्याख्या कर सकते हैं।'

कोर्ट की बात पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री की उपस्थिति का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि, कानून अधिकारी ने कहा कि राजनेताओं का अदालत के सामने पेश होने में कुछ भी गलत नहीं है। इसपर पीठ ने कहा, 'हम समझते हैं कि प्रशांत भूषण एक राजनीतिक व्यक्ति हैं, लेकिन वे मंत्री के साथ बहस नहीं करेंगे।

एनजीओ सीपीआईएल की तरफ से सुनवाई करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि एक सरकार की योजना के अनुसार राष्ट्रीय ई-मोबिलिटी मिशन योजना 2020 के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद की जानी थी। अधिकारियों को मॉल और पेट्रोल पंपों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट प्रदान करने की योजना थी।

पीठ ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए आदेश दिया कि इस बीच इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित सभी मुद्दों पर सरकार द्वारा प्राधिकरण की सहायता से विचार किया जाए।