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लिव इन पार्टनर को भी पत्नी वाला अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्रूरता की तो होगी जेल

Published: Mon, 03 Aug 2026 08:48 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 498ए का दायरा बढ़ाते हुए कहा है कि यह लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले ...और पढ़ें

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HighLights

  1. धारा 498ए अब लिव-इन पार्टनर पर भी लागू होगी।

  2. शादी का इरादा साबित होने पर ही यह प्रावधान लागू।

  3. लिव-इन महिलाओं को शादीशुदा महिलाओं जैसी सुरक्षा मिलेगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आइपीसी की धारा-498ए (पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता से संबंधित) का दायरा बढ़ाते हुए फैसला सुनाया कि यह प्रविधान लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पार्टनर पर भी लागू होगा, अगर शादी करने का इरादा साबित होता है।

अदालत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप आज कमोबेश एक सच्चाई है, खासकर शहरी इलाकों में, जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहता है। लिहाजा कानून को ऐसे लोगों की जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना चाहिए जो इस तरह के रिश्ते चुनते हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष पर महिला के साथ क्रूरता करने के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है, अगर रिश्ता शादी की प्रकृति का हो। पीठ ने कहा कि धारा-498ए के तहत संरक्षित लिव-इन रिलेशनशिप वे माने जाएंगे, जो दो सहमत बालिग व्यक्तियों के बीच हों।

कानून का यह सिद्धांत केवल आइपीसी की धारा-498ए तक ही सीमित रहेगा और इस विस्तारित व्याख्या का किसी अन्य प्रविधान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।" शीर्ष अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी एवं अन्य कारकों से जुड़े सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाएगा।

लिव-इन पार्टनर समेत शादी जैसे रिश्ते में रहने वाले किसी भी व्यक्ति या उसके रिश्तेदार को महिला के साथ क्रूरता करने के आरोप में शुरुआती जांच के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला शादी से पहले ही घरेलू व्यवस्था में रह रही है, तो उसे भी वही सुरक्षा मिलेगी, जो शादीशुदा महिला को मिलती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह जानकर या सोचकर रिश्ते नहीं जोड़ता कि उसके साथ क्रूरता हो सकती है। जब कोई जोड़ा अपना रिश्ता शुरू करता है, तो आम तौर पर यही माना जाता है कि उनकी नीयत अच्छी होती है और वे हर तरह की खुशियां चाहते हैं।

हालांकि, समय के साथ कुछ रिश्तों में मुश्किल आ सकती है। कानून में इसके लिए प्रविधान होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उस सवाल पर सुनवाई के दौरान सुनाया कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले किसी पुरुष पर आइपीसी की धारा-498ए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।