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'सड़क है तो सुरक्षित फुटपाथ भी हो', सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को 5 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश

Published: Mon, 05 Oct 2026 11:31 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 'जहां सड़क है, वहां फुटपाथ हो' सिद्धांत पर पांच शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का जहां सड़क है, वहां फुटपाथ हो' सिद्धांत पर जोर

सुप्रीम कोर्ट का जहां सड़क है, वहां फुटपाथ हो' सिद्धांत पर जोर

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक संवेदनशील और दूरदर्शी मामले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश भर में पांच ऐसे शहरों की पहचान की जाए, जहां 'जहां सड़क है, वहां फुटपाथ हो' के सिद्धांत पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके।

कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि ये फुटपाथ स्पष्ट रूप से सीमांकित और पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त हों, जिससे आम नागरिकों को सुरक्षित चलने का उनका हक मिल सके।

'जहां सड़क है, वहां फुटपाथ हो' सिद्धांत पर जोर 

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अडिशनल सालिसिटर जनरल के.एम. नटराज से कहा कि एक ऐसी केंद्रीय प्राधिकरण की पहचान की जाए जो इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए जिम्मेदार हो।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संस्था के पास इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पर्याप्त धन, बुनियादी ढांचा, स्थान और कर्मचारी होने चाहिए। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।

गौरतलब है कि 24 अगस्त को एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि पैदल चलना और सीमांकित फुटपाथ पर चलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा है।

नागरिकों के पैदल चलने के अधिकार को सुरक्षित करना लक्ष्य

कोर्ट ने यह ऐतिहासिक टिप्पणी की थी कि नागरिकों का पैदल चलने का मौलिक अधिकार सर्वोपरि है और मोटर चालित वाहनों के आवागमन से पहले पैदल यात्रियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे पैदल चलने वालों के लिए सही ढंग से चिह्नित और अतिक्रमण-मुक्त जगहों के बारे में कोर्ट के निर्देशों को लागू करने पर जवाब दें।

बहरहाल, इस पूरी पहल की शुरुआत एक बेहद दुखद हादसे से हुई, जिसमें एक पिता ने स्कूल जाते समय अपने पांच साल के मासूम बेटे को सड़क दुर्घटना में खो दिया था।

कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि यदि सड़क का अस्तित्व है, तो पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथ उपलब्ध कराना प्रशासन का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम देश के हर नागरिक के जीवन की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखने की दिशा में एक भावुक और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)