No इंश्योरेंस-No फ्यूल: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ...और पढ़ें

(एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाहनों को तेल न देने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार को पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का आदेश दिया गया।
56% वाहन बिना इंश्योरेंस के, पीड़ितों को मुआवजा दिलाना लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को एक नया पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके तहत, जिन वाहनों के पास वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर तब तक तेल नहीं दिया जाएगा, जब तक वे अनिवार्य बीमा कवर प्राप्त नहीं कर लेते।
जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर इस पायलट प्रोजेक्ट को विकसित करने को कहा है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों का उपयोग किया जा सकता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
बिना इंश्योरेंस के 16.54 करोड़ वाहन
कोर्ट ने वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाले लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के हैं। देश में कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का मुख्य उद्देश्य केवल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें और उनके परिवारों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है। बिना बीमा वाले वाहनों के कारण अक्सर पीड़ितों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बीमा को जोड़ने का निर्देश
पीठ ने भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को निर्देश दिया कि नई चार पहिया निजी गाड़ियों के लिए थर्ड पार्टी बीमा की अवधि तीन साल से बढ़ाकर चार साल और दोपहिया वाहनों के लिए चार साल से बढ़ाकर छह साल की जाए। साथ ही वाहन मालिकों को बेसिक थर्ड पार्टी कवर के अलावा ओन डैमेज, पर्सनल एक्सीडेंट और अन्य ऐड-आन विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं।
अदालत ने राज्यों को भी निर्देश दिया कि पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप उपलब्ध कराए जाएं, जो वाहन पोर्टल और इंश्योरेंस इंफार्मेशन ब्यूरो के डाटाबेस से जुड़े हों। इससे मौके पर ही किसी वाहन के बीमा की स्थिति की जांच कर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन तभी संभव है, जब प्रत्येक वाहन के पास वैध थर्ड पार्टी बीमा हो। इससे न केवल कानून का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर मुआवजा मिलने का रास्ता भी आसान होगा।
नए वाहनों के लिए बीमा अवधि में बढ़ोतरी
सुप्रीम कोर्ट ने नए खरीदे गए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को भी बढ़ाने का आदेश दिया है। इससे पहले साल 2018 में कोर्ट ने नई कारों के लिए तीन साल और दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल का नियम लागू किया था।
कोर्ट ने पाया कि आठ साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के हैं। इसे देखते हुए अब नई कारों के लिए अनिवार्य बीमा की अवधि बढ़ाकर चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल कर दी गई है। अदालत ने IRDAI को इसके लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है।
तकनीक के जरिए होगी सख्त निगरानी
बिना बीमा वाले वाहनों पर लगाम कसने के लिए कोर्ट ने तकनीकी उपयोग पर विशेष जोर दिया है। IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय को राज्यों में ANPR कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें बीमा सूचना ब्यूरो और VAHAN पोर्टल के डेटा से जोड़ा जाएगा ताकि बिना बीमा वाले वाहनों का ऑटोमैटिक ई-चालान कट सके।
इसके साथ ही, ट्रैफिक पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएंगे जो सीधे VAHAN डेटा से जुड़े हों, जिससे मौके पर ही बीमा स्थिति की रियल-टाइम जांच हो सके। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वाहन मालिकों को बेस पॉलिसी के साथ-साथ ऐड-ऑन कवर, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और ओन-डैमेज कवर जैसे विभिन्न विकल्प भी प्रदान किए जाएं।
