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रूस में मारे गए भारतीयों के परिवारों को मिले मुआवजा, SC ने कहा- ये उनका कानूनी हक; MEA को नोटिस जारी करने को कहा

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:43 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने रूस-यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए विदेश मंत्रालय को सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

रूस में मारे गए भारतीयों के परिवारों को मिले मुआवजा।

रूस में मारे गए भारतीयों के परिवारों को मिले मुआवजा।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे के लिए विदेश मंत्रालय को नोटिस दिया।

  2. युद्ध पीड़ितों के परिवारों का मुआवजा कानूनी हक है।

  3. डीएनए टेस्ट, मुआवजे हेतु मुफ्त कानूनी सहायता मिलेगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह एक सार्वजनिक नोटिस जारी करे। इस नोटिस का उद्देश्य उन सभी पीड़ित परिवारों तक मदद पहुंचाना है, जिनके स्वजनों ने इस युद्ध में अपनी जान गंवाई है, ताकि उन्हें समय पर मुआवजा और सहायता मिल सके।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि मुआवजा पाने का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है और इसे हर हाल में लागू किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से पेश अडिशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अपनी ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 267 भारतीय रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए थे, जिनमें से 51 लोगों की मौत हो चुकी है, 139 को सैन्य सेवा से छुट्टी मिल चुकी है, और 77 अभी भी लापता हैं।

कोर्ट ने विशेष रूप से उन छह परिवारों के मामलों का ब्योरा मांगा है, जिन्हें रूसी सरकार द्वारा मुआवजा दिया जा चुका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि युद्ध में जान गंवाने वाले सभी 51 नागरिकों के परिवारों को मुआवजा मिलना उनका कानूनी हक है।

इसके साथ ही, कोर्ट ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवारों को डीएनए टेस्ट और मुआवजे के दावे से जुड़ी प्रशासनिक औपचारिकताओं के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करें।

यह पूरा मामला उन भोले-भाले भारतीय युवाओं से जुड़ा है, जिन्हें एजेंटों ने धोखे से अच्छी नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाया था और फिर उनके पासपोर्ट एवं दस्तावेज जब्त कर उन्हें जबरन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस मानवीय और कड़े रुख से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की एक नई उम्मीद जागी है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)