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'अदालती कार्यवाही के लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं', सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी 

Published: Fri, 30 Oct 2026 10:05 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग के अनधिकृत उपयोग और व्यावसायिक दोहन पर कार्रवाई के प्रावधान नीतिगत ढांचे में शामिल किए जाएं।

अनधिकृत लाइव-स्ट्रीम उपयोग पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल हों

अनधिकृत लाइव-स्ट्रीम उपयोग पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल हों

HighLights

  1. अनधिकृत लाइव-स्ट्रीम उपयोग पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल हों

  2. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नीतिगत ढांचे में निर्देश दिए

  3. प्रशांत भूषण ने डिजिटल हस्ताक्षर, वाटरमार्क का सुझाव दिया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि प्रस्तावित नीतिगत ढांचे में उन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के प्रविधान शामिल किए जाएं, जो अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीम को अनधिकृत तरीके से हासिल करने, प्रसारित करने और उसका व्यावसायिक दोहन करने पर लगी अंतरिम रोक का उल्लंघन करते हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर संज्ञान लिया कि विभिन्न हाई कोर्टों और अन्य हितधारकों से मिले सुझावों को व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने के लिए इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेज दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नीतिगत ढांचे में निर्देश दिए

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मंत्रालय सुझावों पर विचार करेगा और कुछ दिनों में जवाब देगा। उन्होंने आगे सुनवाई के लिए याचिका को दीपावली की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

मेहता ने पहले के आदेशों के उल्लंघन का भी उल्लेख किया और पीठ से अनुरोध किया कि वह प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अपलोड की गई सामग्री हटाने का निर्देश देने पर विचार करे। इस पीठ ने कहा, 'निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रविधान भी नीतिगत व्यवस्था में शामिल किए जाएंगे।'

पीठ ने अपने आदेश में नौ अक्टूबर, 2026 के आदेश सहित पहले जारी अंतरिम निर्देशों का उल्लेख किया और उनका अनुपालन व प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि अदालत की ओर से जारी हर आधिकारिक क्लिप पर सत्यापन योग्य डिजिटल हस्ताक्षर या वाटरमार्क होना चाहिए, ताकि आम लोग और डिजिटल प्लेटफार्म असली फुटेज को पहचान सकें।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अदालत की सभी कार्यवाहियां प्रमाणित और वाटरमार्क वाले प्रारूप में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएं।

अदालत ऐसे समय इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही है, जब न्यायिक कार्यवाहियों के वीडियो क्लिप को अनधिकृत रूप से हासिल करने, उनमें बदलाव करने, प्रसारित करने और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने को लेकर चिंता जताई जा रही है। इन क्लिप के साथ अक्सर भ्रामक कैप्शन या दावे भी होते हैं।

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