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अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 3 राज्यों से मांगा जवाब; CEC को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश 

Published: Tue, 06 Oct 2026 11:23 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे नदी तंत्र पर विनाशकारी प्रभाव बताया है। कोर्ट ...और पढ़ें

अवैध रेत खनन को सुप्रीम कोर्ट ने बताया विनाशकारी प्रभाव।

अवैध रेत खनन को सुप्रीम कोर्ट ने बताया विनाशकारी प्रभाव।

HighLights

  1. अवैध रेत खनन को सुप्रीम कोर्ट ने बताया विनाशकारी प्रभाव।

  2. केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) से मांगी विस्तृत रिपोर्ट।

  3. चंबल अभयारण्य और केन नदी में अवैध खनन पर संज्ञान।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नदियों की धारा और उनकी अनमोल प्राकृतिक संपदा को उजाड़ने वाले अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने अत्यधिक गंभीर रुख अपनाया है।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नदी तल से होने वाला अवैध रेत खनन संपूर्ण नदी तंत्र पर एक "विनाशकारी प्रभाव" डाल रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर रोकना ही होगा।

इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी - सीईसी) को तलब करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है।

सीईसी 2023 से एक वैधानिक निकाय है जो मूल रूप से 2002 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित किया गया था। इसकी प्राथमिक भूमिका पर्यावरण और वन मामलों से संबंधित रिट याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट को सलाह देना और उसके आदेशों की निगरानी और अनुपालन में सहायता करना है।

बहरहाल, यह संपूर्ण कार्रवाई राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है) में अवैध खनन और जलीय जीवों पर मंडराते गंभीर खतरों को लेकर स्वतः संज्ञान के तहत चल रही है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस चंबल अभयारण्य के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और वैधानिक उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे।

कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश - इन तीनों राज्यों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए दो सप्ताह के भीतर अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

कोर्ट की चिंता का मुख्य केंद्र केवल चंबल तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की केन नदी में जारी अवैध खनन पर भी इसने संज्ञान लिया है।

सुनवाई में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि कैसे पिछले महीने राजस्थान में अवैध खनन को रोकने के प्रयास के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ वनरेंजर की डंपर से कुचलकर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी।

इस दर्दनाक और वीभत्स घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि राज्य में अवैध रेत से लदे वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं, और हम अपने राज्यों की नदियों को इस तरह तबाह नहीं होने दे सकते।

न्याय के हित में यह मामला अब आगामी चार नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जहां सीईसी की रिपोर्ट और राज्यों के हलफनामों पर अहम सुनवाई होगी। कोर्ट ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि प्राकृतिक संसाधनों को दीमक की तरह चाटने वाले अवैध खननकर्ताओं और उनके संरक्षकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, और ऐसे तत्वों के खिलाफ निवारक हिरासत (प्रीवेंटिव डिटेंशन) जैसे सख्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि हमारी नदियां और उनका जीवन सुरक्षित रह सके।

सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI से मिले इनपुट के अनुसार

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