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'छात्रों की आड़ में अपराधी रियायत के हकदार नहीं', नीट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

Published: Mon, 03 Aug 2026 09:10 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR पर स्पष्टीकरण दिया, कहा गंभीर अपराधों में शामिल छात्रों को राहत नहीं मिलेगी।

छात्रों की आड़ में अपराधी रियायत के हकदार नहीं। (फाइल)

छात्रों की आड़ में अपराधी रियायत के हकदार नहीं। (फाइल)

HighLights

  1. गंभीर अपराधों में शामिल छात्रों को एफआईआर में राहत नहीं।

  2. पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग पर कोर्ट ने चिंता जताई।

  3. निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी या समिति का गठन संभव।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली और अन्य राज्यों की सरकारें नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर या राज्यों में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर बंद कर सकती हैं या वापस ले सकती हैं बशर्ते कि उनके खिलाफ गंभीर या जघन्य अपराध का कोई पिछला रिकॉर्ड न हो।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "आपराधिक पृष्ठभूमि" का अर्थ गंभीर और जघन्य अपराधों से हैं। साथ ही कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारी को बेवजह बचाया नहीं जाना चाहिए और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र विरोध-प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी को रियायत मिल जाए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने यह स्पष्टीकरण तब दिया जब कुछ वकीलों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि 28 जुलाई के आदेश को स्पष्ट किया चाहिए जिसमें कोर्ट ने कहा था कि पुलिस मामलों की जांच जारी रख सकती है। छात्रों के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जाएंगे और ये संरक्षण उन्हें प्राप्त नहीं होगा जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि है।

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि इससे पुलिस में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और ऐसे में जिन छात्रों के खिलाफ छोटे-मोटे अपराध दर्ज जैसे ट्रैफिक उल्लंघन या राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के मामले दर्ज हैं, उनके केस को वापस नहीं लिया जाएगा। कोर्ट स्पष्ट करे कि आपराधिक पृष्ठभूमि का अर्थ गंभीर अपराध जैसे हत्या, दुष्कर्म आदि अपराध से है।

हालांकि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनकी छात्रों की वकील वृंदा ग्रोवर से लगातार बातचीत हो रही है और सरकार केवल गंभीर अपराधों की पृष्ठभूमि वाले मामलों की बात कर रही है। मेहता ने बताया कि गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल 2,700 से अधिक लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी।

शंकरनारायण ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों के बच्चों के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कोर्ट को 300 वीडियो सौंपे हैं, जो बहुत चौकाने वाले हैं। चूंकि ऊपर से निर्देश आए हैं, इसलिए पुलिस कमिश्नर को इस सब पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने बिना वर्दी वाले उन लोगों की पहचान की है जो ऐसी ज्यादती कर रहे थे।

पुलिस कमिश्नर और आरएएफ डायरेक्टर को निर्देश दिया जाना चाहिए वो बताएं कि पैलेट गन वगैरह का इस्तेमाल क्यों और किसके निर्देश पर किया गया? हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वीडियो दूसरी तरफ के भी हैं। पैलेट गन के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि वो इस पर एक संपूर्ण प्रोटोकॉल तैयार करना चाहते हैं कि इसका प्रयोग कब और कैसे किया जा सकता है।

पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने के संकेत दिए थे। आज हुई सुनवाई में पीठ ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित किया जाए या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए। कोर्ट ने इस पर पक्षकारों से सुझाव देने को भी कहा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

दिल्ली में 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

छात्रों पर लाठीचार्ज और अत्याचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं। हालांकि, हिंसा के शिकार घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने भी न्याय की गुहार लगाई है।

सीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण का किया स्वागत

पीटीआई के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर को वापस लेने के स्पष्टीकरण का स्वागत किया। साथ ही कहा कि वह केंद्र और भाजपा/राजग शासित राज्यों से अपेक्षा करती है कि वे 25 जुलाई के समझौते के तहत आंदोलनरत छात्रों को दिए गए आश्वासनों का तुरंत क्रियान्वायन करें।

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आज युवाओं की एक और बड़ी जीत हुई है। सीजेपी केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में है और आश्वासनों के क्रियान्वयन की निगरानी कर रही है।