SMA पीड़ितों के इलाज के लिए बनेगा स्थायी कोष? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्क्युलर एट्राफी (SMA) से पीड़ित मरीजों के महंगे इलाज के लिए केंद्र सरकार से स्थायी कोष ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने SMA मरीजों के स्थायी इलाज कोष पर केंद्र से जवाब मांगा।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने SMA मरीजों के स्थायी इलाज कोष पर केंद्र से जवाब मांगा।
व्यक्तिगत दान और अनियमित सरकारी सहायता को अपर्याप्त बताया गया।
न्यायमित्र को कोष जुटाने, बनाए रखने के उपाय सुझाने को कहा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्क्युलर एट्राफी (एसएमए) से पीड़ित मरीजों के महंगे और जीवनरक्षक इलाज के लिए स्थायी कोष बनाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत दान और सरकार की अनियमित आर्थिक सहायता इस दुर्लभ और गंभीर आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे मरीजों की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मरीजों के उपचार के लिए नियमित और स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है। पीठ ने यह भी कहा कि केवल कोष बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके सर्वोत्तम और प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमित्र नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह से कोष जुटाने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने के उपायों पर विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा है। प्रस्ताव में कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर), संस्थागत दानदाताओं और केंद्र सरकार के योगदान जैसे विकल्प शामिल किए जाएंगे।
पीठ ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल अनिल कौशिक के माध्यम से केंद्र से इस संबंध में हलफनामा भी मांगा है। यह मामला एसएमए क्योर फाउंडेशन की याचिका के बाद अदालत के संज्ञान में आया था। संस्था ने दिव्यांग व्यक्तियों पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मुद्दा उठाया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को समय रैना समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद कर दी थी। कोर्ट ने दिव्यांगों के प्रति जागरूकता और उनकी गरिमा बढ़ाने के प्रयासों की सराहना भी की थी।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
