संजय कपूर की प्रॉपर्टी लड़ाई सुलझाएंगे पूर्व CJI चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट ने बनाया मध्यस्थ
सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के 30,000 करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा है।

संजय कपूर की प्रॉपर्टी लड़ाई सुलझाएंगे पूर्व CJI चंद्रचूड़(फाइल फोटो)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवाद मध्यस्थता को भेजा
पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ मध्यस्थ नियुक्त किए गए
30,000 करोड़ रुपये का पारिवारिक विवाद
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां 80 वर्षीय रानी कपूर और उनकी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच 30,000 करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षकारों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस मामले में सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और न ही सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी करें।
मध्यस्थता केवल पारिवारिक सदस्यों तक सीमित
कोर्ट ने कहा, “हम स्पष्ट करते हैं कि यह मध्यस्थता केवल पारिवारिक सदस्यों तक ही सीमित रहेगी। हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर चर्चा न करें।”
कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि यह एक पारिवारिक विवाद है, इसलिए इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास होना चाहिए। पीठ ने सभी पक्षों से खुले मन से मध्यस्थता में भाग लेने की अपील की।

रानी कपूर की याचिका पर नोटिस जारी
27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर प्रिया सचदेव कपूर समेत 22 अन्य लोगों को नोटिस जारी किया था। उस समय कोर्ट ने संकेत दिया था कि ऐसे पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता बेहतर विकल्प हो सकता है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि 80 वर्षीय व्यक्ति के लिए लंबा मुकदमा लड़ना उचित नहीं है।
कोर्ट का सख्त संदेश
पीठ ने कहा, “आप सब क्यों लड़ रहे हैं? आपकी उम्र 80 साल है। यह आपके मुवक्किल की लड़ने की उम्र नहीं है। एक बार में शुरू से अंत तक मध्यस्थता के लिए जाएं। अन्यथा यह सब व्यर्थ है।”
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सभी पक्षों के हित में यही बेहतर है कि वे मध्यस्थता के जरिए विवाद को शांतिपूर्ण और न्यायसंगत तरीके से सुलझाएं। यदि मध्यस्थता विफल रही तो कोर्ट मामले की मेरिट पर सुनवाई करेगा।
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