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 सिर्फ मेट्रो से काम नहीं चलेगा, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को चाहिए सुरक्षित और सस्ता परिवहन

Published: Sun, 01 Nov 2026 10:25 PM (IST)

महिलाओं को रोजगार स्थल तक पहुंचने में सुरक्षित और सस्ते परिवहन की कमी बड़ी बाधा है, जिससे उनकी कार्यबल भागीदारी ...और पढ़ें

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सस्ता व सुरक्षित ट्रांसपोर्ट जरूरी (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

 महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सस्ता व सुरक्षित ट्रांसपोर्ट जरूरी (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मेट्रो से लेकर विभिन्न प्रकार के परिवहन साधन विकसित होने के बावजूद भारतीय महिलाओं के एक बड़े वर्ग को अपने घर से लेकर रोजगार के गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई होती है। तभी विभिन्न प्रकार के रोजगार से जुड़ीं महिलाएं शाम चार बजे तक अपने घर के लिए निकल जाती हैं। रोजगार से जुड़ीं काफी कम महिलाएं शाम छह बजे के बाद काम करती हैं।

वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक रिपोर्ट में महिलाओं की मोबिलिटी के साधन बढ़ाने की सिफारिश करते हुए इन बातों को उजागर किया गया है। महिलाएं अब भी सुरक्षित और सस्ते परिवहन साधानों की तलाश में हैं।

मेट्रो का जाल देशभर में फैलता जा रहा है, लेकिन मेट्रो से महिलाएं एक निश्चित जगह तक पहुंच पाती है। वहां से उन्हें अपने कार्य के स्थान तक जाने का साधन आसानी से नहीं मिलता।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सस्ते एवं सुरक्षित परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध होने से महिलाओं में रोजगार बढ़ेंगे। वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी महिलाओं से जुड़ी परिवहन की पूरी शृंखला को सुगम एवं सस्ता बनाने की सिफारिश की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षित परिवहन के साधन के अभाव में महिलाएं महंगे साधन को अपनाती हैं जो अपेक्षाकृत गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लेते हैं। रिपोर्ट में आईआईटी, मुंबई के सर्वे के हवाले से कहा गया कि जिन जगहों पर महिलाओं की मोबिलिटी को लेकर कड़े नियम थे, वहां मुफ्त बस सेवा स्कीम से विभिन्न प्रकार के रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाएं विभिन्न कारणों से पुरुषों की तुलना में रोजगार के लिए कम दूरी तक जाना चाहती हैं। यही वजह है कि महिलाओं को प्रतिमाह आने-जाने में औसतन 533 रुपये का खर्च आता है, जबकि पुरुषों को प्रतिमाह 674 रुपये देने पड़ते हैं। महिलाएं घर के पास के रोजगार को अधिक प्राथमिकता देती है।

सिर्फ 42 प्रतिशत महिलाएं काम के लिए एक किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी तय करती है। जबकि 62 प्रतिशत पुरुष काम के लिए एक किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी तय करते हैं। ग्रामीण इलाके में 65 प्रतिशत महिलाएं अपने काम पर पैदल जाती है। शहरी इलाके में 37.5 प्रतिशत महिलाएं काम पर जाने के लिए आटो या बस सेवा लेती है।

केरलम में सबसे अधिक रोजगार के लिए जाने वाली 47 प्रतिशत महिलाएं बस का इस्तेमाल करती है। तमिलनाडु में 41 प्रतिशत, कर्नाटक में 35 प्रतिशत, तेलंगाना में 29 प्रतिशत महिलाएं बस सेवा से काम पर आती-जाती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि काम पर जाने की अवधि कम होने पर महिलाएं अधिक समय तक काम कर सकेंगी। देश के कई राज्यों में नगर बस सेवा की उचित सुविधा नहीं होने से उन शहरों की महिलाओं को काम पर जाने में परेशानी होती है।

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