नई दिल्ली, एएनआइ। कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल को-ऑपरेशन (SAARC) ने आपातकालीन फंड बनाने के घोषणा की है। पाकिस्तान द्वारा सार्क कोविड- 19 इमरजेंसी रिस्पांस फंड में 30 लाख अमरीकी डालर दान करने के बादे से पीछे हटता दिख रहा है। इसको लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रत्येक राष्ट्र की गंभीरता का अंदाजा उनके व्यवहार से लगाया जा सकता है।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने गुरुवार को घोषणा करते हुए कहा था कि वह सार्क कोविड-19 आपातकालीन फंड में 30 लाख अमरीकी डालर का योगदान देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्क सदस्य देशों के एक वीडियो सम्मेलन के दौरान फंड बनाने के प्रस्ताव के हफ्तों बाद पाकिस्तान का यह बयान आया है।

बता दें कि पार्धानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सार्क देशों ने तुरंत कोविड- 91 आपातकालीन फंड में योगदान के लिए अपनी एकजुटता दिखाई, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से यह घोषणा हाल ही में की गई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका ने भी कोष के लिए प्रारंभिक सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जहां तक भारत का संबंध है, प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रतिबद्धता अपने अंतिम चरण में है। पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के अन्य सभी देशों ने तुरंत कोरोना वायरस आपातकालीन फंड में दान कर दिया था।

अफगानिस्तान ने महामारी से लड़ने के लिए सार्क देशों के प्रमुखों के बीच चर्चा में 10 लाख अमरीकी डालर का योगदान दिया था। नेपाल ने सार्क आपातकालीन फंड को 100 मिलियन एनपीआर दिया था, मालदीव सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए आपातकालीन फंड में 2 लाख अमरीकी डालर का योगदान दिया था। भूटान ने फंड में एक लाख अमरीकी डालर, जबकि भारत ने फंड के लिए एक करोड़ अमरीकी डालर का प्रारंभिक प्रस्ताव दिया है।

इस बीच पाकिस्तान ने कोविड-19 से निपटने के लिए सार्क से मदद मांगी है। पाकिस्तान ने सार्क से 3 मिलियन डॉलर की सहायता मांगी है। फंड को लेकर गुरुवार को विदेश सचिव सोहेल महमूद और सार्क के महासचिव एसला रुवान वेराकून के बीच टेलीफोन पर चर्चा भी हुई।

Posted By: Manish Pandey

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