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मुंबई में जयशंकर-रुबियो की बैठक: ट्रेड, एच-1बी वीजा और PAK से US की नजदीकी पर होगी बातचीत

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:04 PM (IST)

भारत और अमेरिका के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रुबियो मुंबई में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों देशों ...और पढ़ें

मुंबई में जयशंकर-रुबियो की अहम बैठक (फाइल फोटो)

मुंबई में जयशंकर-रुबियो की अहम बैठक (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के रिश्तों में अपेक्षित गर्मजोशी नहीं है।

आईटी प्रोफेशनल्स के मुद्दे, एच-1बी वीजा, ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान के साथ बढ़ती निकटता, रूसी तेल खरीदने का मामला, ट्रेड वार्ता को लेकर अड़चन और कई अन्य विवादों के कारण ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जो उम्मीदें जगी थीं, वे पूरी नहीं हो पाई हैं।

ऐसे में दोनों विदेश मंत्री तमाम चुभते मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि, “बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक होगी जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को लेकर ज्यादा फोकस रहेगा।

इस साल रुबियो दूसरी बार भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली यात्रा का मुख्य केंद्र क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जहां भारत के साथ अलग से सीमित चर्चा हुई थी। इस बार उनका एजेंडा साफ तौर पर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और मजबूत करने पर केंद्रित है।

अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार की मुलाकात पुरानी बैठकों से काफी अलग होगी, क्योंकि इसमें क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंच की छाया नहीं रहेगी। यह पूरी तरह द्विपक्षीय होगी और दोनों पक्ष खुले मन से मुद्दों पर बात करेंगे।

ट्रंप प्रशासन पहले ही बता चुका है कि रुबियो की यात्रा में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग काफी अहम रहने वाला है। अमेरिका ना सिर्फ भारत को ऊर्जा बेचना चाहता है बल्कि वह अब रिफाइनरी उत्पादों (खास तौर पर डीजल) खरीददार के तौर पर भी विकल्प देख रहा है।

रुबियो व जयशंकर की मुलाकात में अमेरिका से ऊर्जा आयात, सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर रहेगा। इसके बाद वह जामनगर जाएंगे जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों के साथ उनकी अलग बैठक होगी। इसमें रिलायंस की तरफ से अमेरिका में लगाई जाने वाली रिफाइनरी, वेनेजुएला से उत्पादित क्रूड की खरीद, रिलायंस की रिफाइनरी से डीजल आपूर्तिजैसे मुद्दे रहेंगे।

यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी विदेश मंत्री अपने पूरे आधिकारिक टीम के साथ जामनगर जा रहा है, जहाां रिलायंस की विशाल तेल रिफाइनरी स्थिति है।

इसके बाद रक्षा सहयोग को व्यापक बनाने की बात होगी। दोनों देश रक्षा क्षेत्र में और अधिक साझेदारी, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ध्यान दे रहे हैं। तीसरा बड़ा मुद्दा द्विपक्षीय कारोबार है। व्यापार संबंधी बाधाओं, टैरिफ और निवेश से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की कोशिश होगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, पश्चिम एशिया के हालात में बेहतर सामंजस्य और यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी बातचीत होगी।

पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम और भारत की भूमिका को लेकर दोनों पक्ष अपनी समझ साझा कर सकते हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध पर अमेरिका और भारत के रुख में अंतर रहा है, इसलिए इस पर भी समन्वय की कोशिश संभव है।

जयशंकर और रुबियो के बीच यह मुलाकात रिश्तों में आई खटास को कम करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। एच-1बी वीजा और भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स से जुड़े मुद्दों पर भी अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष चर्चा होने की संभावना है। बैठक के बाद दोनों पक्षों के बयान और आगे के रास्ते पर नजर रहेगी।