विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने में रूस शीर्ष पर बरकरार, एलपीजी और एलएनजी देने में अमेरिका नंबर वन

Published: Thu, 03 Sep 2026 05:30 AM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 07:14 AM (IST)

अमेरिका अब भारत को रसोई गैस और तरल प्राकृतिक गैस  की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभरा है।

अगस्त 2026 में भारत के ऊर्जा आयात का नया रिकॉर्ड (फोटो- रॉयटर)

अगस्त 2026 में भारत के ऊर्जा आयात का नया रिकॉर्ड (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. अगस्त 2026 में भारत के ऊर्जा आयात का नया रिकॉर्ड बनाया है

  2. भारत के कुल रूसी तेल आयात में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगस्त 2026 के दौरान भारत के ऊर्जा आयात के आंकड़ों में एक बड़ा और दिलचस्प रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के बावजूद, रूस भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है।

हालांकि, चीन द्वारा रूसी कच्चे तेल की आक्रामक खरीद और रूस द्वारा मिलने वाले डिस्काउंट (छूट) में कमी आने के कारण, इस महीने भारत के कुल रूसी तेल आयात में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है।

इस बीच, यूक्रेन के हमलों के कारण रूसी घरेलू रिफाइनरियों को हुए नुकसान के चलते एक अनोखा व्यापारिक घटनाक्रम भी सामने आया है, जहाँ भारत, तुर्की और मोरक्को के साथ मिलकर रूस को पेट्रोल (गैसोलीन) और डीजल का निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है।

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में आ रही बाधाओं के बीच भारत ने अपनी गैस आयात रणनीति में बड़ा विविधीकरण किया है।

इसके चलते अमेरिका अब भारत को रसोई गैस और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभरा है। अगस्त महीने के दौरान भारत द्वारा आयात की गई कुल 1.1 मिलियन (11 लाख) टन एलपीजी में से अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 51 प्रतिशत (0.6 मिलियन टन) रही।

खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होने के कारण अमेरिका के बाद संयुक्त अरब अमीरात अल्जीरिया ही क्रमशः 0.1 मिलियन टन के साथ अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे।

ठीक इसी तरह, भारत के एलएनजी बाजार में भी अमेरिकी गैस का दबदबा साफ देखा गया, जहां अगस्त के दौरान भारत द्वारा आयात किए गए कुल 2.2 मिलियन टन एलएनजी में से अकेले अमेरिका ने 38 फीसदी यानी 0.8 मिलियन टन की आपूर्ति की।

अमेरिकी एलएनजी के बाद भारत ने ओमान से 0.5 मिलियन टन और नाइजीरिया से 0.4 मिलियन टन एलएनजी की खरीद की।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाड़ी देशों से हटकर अमेरिका और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से गैस मंगाना तो शुरू कर दिया है, लेकिन इन लंबी समुद्री यात्राओं के कारण जहाजों का मालभाड़ा और बीमा शुल्क काफी बढ़ गया है, जिससे कुल आयात लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।