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रूसी सेना में शामिल भारतीयों की कब होगी वापसी? रूस ने दिया बड़ा अपडेट; पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से की थी चर्चा

पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी बैठक में रूसी सेना में भारतीयों के शामिल करने का मुद्दा उठाया था। अब भारत में रूस के प्रभारी राजदूत रोमन बाबुश्किन का कहना है कि रूस अपनी सेना में भारतीयों को नहीं चाहता क्योंकि रूस को इसकी जरूरत नहीं है। वहीं पुतिन ने पीएम मोदी को आश्वस्त किया था कि सभी भारतीयों को स्वदेश भेज दिया जाएगा।

By Jagran News Edited By: Sonu Gupta Wed, 10 Jul 2024 11:45 PM (IST)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। फाइल फोटो।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूस ने इस बात से साफ तौर पर इनकार किया है कि उसकी सेना में किसी अभियान के तहत भारतीयों की भर्ती की गई है। भारत में रूस के प्रभारी राजदूत रोमन बाबुश्किन का कहना है कि रूस अपनी सेना में भारतीयों को नहीं चाहता क्योंकि रूस को इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन जिस भी स्थिति में भारतीय वहां की सेना में काम कर रहे हैं उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था होगी।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से उठाया था मुद्दा

पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। इस पर पुतिन ने उन्हें आश्वस्त किया था कि सभी भारतीयों को स्वदेश भेज दिया जाएगा। भारत पिछले तीन महीनों से इस मुद्दे को उठा रहा है जिस पर पहली बार रूस के किसी बड़े अधिकारी ने बयान दिया है।

रोमन बाबुश्किन ने क्या कहा?

मोदी की रूस यात्रा को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बाबुश्किन ने कहा, रूस कभी नहीं चाहता कि भारतीय उसकी सेना का हिस्सा बनें। इस बारे में ना तो हमनें कभी अभियान चलाया और ना ही कभी विज्ञापन दिया है। हो सकता है कि अभी 50, 60 या अधिकतम सौ भारतीय वहां की सेना के साथ जुड़े हों लेकिन रूस की सेना के आकार को देखते हुए यह बहुत ही नगण्य है।

इस मुद्दे पर हम पूरी तरह से भारत सरकार के साथ हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा। जहां तक भारतीयों के वहां जाने की बात है तो बहुत संभव है कि वह किसी वाणिज्यिक समझौते के तहत वहां पहुंचे हों क्योंकि वह कुछ पैसा कमाना चाहते थे। हम उन्हें भर्ती करना नहीं चाहते।- रोमन बाबुश्किन,  भारत में रूस के प्रभारी राजदूत

यूक्रेन-युद्ध में मारे गये भारतीयों पर क्या बोले?

यह पूछे जाने पर कि जो भारतीय यूक्रेन-युद्ध में मारे गये हैं क्या उन्हें रूस की तरफ से नागरिकता दी जाएगी तो उनका जवाब था कि, ऐसा हो सकता है क्योंकि कई बार समझौते में इस तरह की शर्ते होती हैं। बाबुश्किन ने मोदी और पुतिन के बीच हुई 22वीं सालाना शिखर सम्मेलन में आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में उठे मुद्दों को विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक आपसी कारोबार को 100 अरब डॉलर तय करने के बाद भारत और रूस इसका लेन-देन स्थानीय मुद्रा में करने को प्राथमिकता देंगे। इस बार में विमर्श चल रहा है। 

इसी तरह से अंतरराष्ट्रीय लेन देन के लिए अमेरिका व पश्चिमी देशों के केंद्रीय बैंकों की तरफ से संचालित मौजूदा स्विफ्ट (द सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) व्यवस्था का विकल्प तैयार करने को लेकर भी भारत और रूस के बीच विमर्श चल रहा है। दोनों देश पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद को लेकर दीर्घकालिक समझौता करने पर भी बात कर रहे हैं।

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