नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1 हजार के नोट बंद कर देने के बाद राजनीतिक पार्टियों के लिए उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले चुनाव में वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। उत्तर प्रदेश और पंजाब एक ऐसा राज्या है जहां पैसा चुनाव मैनजमेंट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इस फैसले के बाद पैसा खर्च करने की पार्टियों की रणनीतियों में बदलाव हो सकते हैं।

'काले धन का ढेर हुआ बेकार'

एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि 'चुनाव से पहले राजनीतिक दलो के पास अभियान चलाने के लिए पहले ही कालाधन रखा हो सकता है। इस फैसले के बाद नकदी का यह ढेर अब एक बेकार ढेर हो गया है। चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों के लिए आज का यह फैसला किसी आपदा से कम नहीं है। राजनीतिक पार्टिया अब चुनावी रणनीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।'

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दूसरों की तुलना में राजनीतिक पार्टियां होंगी अधिक प्रभावित

राजनीतिक विशलषकों का कहना है कि 500 और 1,000 रुपये के नोटों के बंद होने से दूसरों की तुलना में राजनीतिक दल अधिक प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रीय खिलाड़ियों को जो अभी तक नियमों को चकमा देकर नकदी की सतत प्रवाह को सुनिश्चित करने के जटिल तरीके में महारथ रखते थे

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2014 में आम चुनाव में जब्त हुए थे 330 करोड़ रुपए

आपको बता दें चुनाव आयोग द्वारा सभी राजनीतिक पार्टियों को यह दिशा निर्दश जारी होते है कि चुनाव प्रचार में लगाई जाने वाली राशि पहले से ही घोषित करें जिससे पारदर्शिता रहे, लेकिन फिर भी राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव प्रचार में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल होता है। साल 2014 में आम चुनाव में 330 करोड़ रुपए जब्त किए गए थे।

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