कानपुर, जेएनएऩ। कानपुर के दो इंजीनियरों ने ऐसा वेंटिलेटर विकसित किया है, जिसमें संक्रमण का खतरा बिलुकल नहीं है। इसके ऐसे पार्ट्स को हर बार बदला जा सकता है। एक समय में 10 मरीजों को सपोर्ट दिया जा सकता है। पढ़ें और शेयर करें कानपुर से विक्सन सिक्रोडिय़ा की रिपोर्ट।

कानपुर, उप्र स्थित हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग से बीटेक दो युवा इंजीनियरों शिवशंकर उपाध्याय और शुभंकर बंका ने टेकब्लेज टेक्नोलॉजिकल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड स्टार्टअप के तहत रक्षक नामक यह मेडिकल वेंटिलेटर विकसित किया है। इसमें महज 2,500 रुपये में रेस्पेरेटरी चैनल, मरीज के संपर्क में आने वाले पार्ट्स का सेट बदल दिया जाएगा, जिससे संक्रमण का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। वहीं, इसकी एक खासियत यह भी है कि इसमें इमरजेंसी सिस्टम भी संलग्न है। किसी कारण एक मशीन बंद हो जाए तो दूसरी शुरू हो जाएगी। फिलहाल इस वेंटिलेटर की लागत एक लाख रुपये आई है, जबकि व्यावसायिक उत्पादन होने पर कीमत महज 80 हजार रुपये रह जाएगी।

शिवशंकर और शुभंकर ने बताया कि इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें वह सारे फीचर्स हैं, जो 15 लाख रुपये के वेंटिलेटर में भी नहीं होते हैं। उन्होंने बताया कि आम तौर पर वेंटिलेटर को केमिकल के जरिए स्टरलाइज या जीवाणु-विषाणु मुक्त किया जाता है, लेकिन पाइप इत्यादि के अंदरूनी हिस्से पूरी तरह स्टरलाइज हुए हैं कि नहीं, इसमें संदेह रहता है। अकसर इन पार्ट्स मेें वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हो पाता है। इसीलिए वेंटिलेटर्स को संक्रमण का एक कारण माना जाता है।

शिवशंकर ने कहा, ऐसे में कोरोना संक्रमित मरीज को वेंटिलेटर के जरिए मिला कोई अन्य संक्रमण घातक साबित हो सकता है। हमने इस समस्या का समाधान प्रस्तुत किया है। वेंटिलेटर के रेस्पेरेटरी चैनल यानी कंप्रेशन सेक्शन को ही सिंगल यूज के लिए रखा है। एक बार एक मरीज पर इस्तेमाल होने के बाद इसे निकाल कर डिस्पोज किया जा सकता है और नए मरीज के लिए 2,500 की लागत का नया सैट लगाया जा सकता है। इसमें अंबू बैग इनबिल्ट किया गया है, जो खुद ही पंप करके मरीज की जरूरत पर सांस देता है।

शुभंकर ने बताया, इसमें लगी कंसंट्रेटर मशीन हवा में मौजूद ऑक्सीजन को लेकर उससे नाइट्रोजन को अलग करती है और मरीज को ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन देती है। यह इलेक्ट्रिक और बैटरी दोनों से चलता है। वेंटिलेटर से एक साथ 10 मरीजों को जीवनरक्षी सपोर्ट उपलब्ध कराया जा सकता है। अलग-अलग मरीजों की मॉनिटरिंग भी स्क्रीन पर कर सकते हैं। आइसोलेट किए गए मरीजों के पास तीमारदार नहीं रहते हैं। ऐसे में मरीज यदि डॉक्टर को बुलाना चाहें तो इसमें अलार्म सुविधा भी है।

संक्रमण के लिहाज से वेंटिलेटर में सबसे अहम रेस्पेरेटरी चैनल या ट्यूबिंग होती है। इसे डिसइंफेक्ट करने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कई बार वायरस रह जाते हैं। फंगस का भी खतरा होता है। इससे बचने के लिए ट्यूबिंग बदलनी चाहिए, लेकिन महंगा होने के कारण अस्पताल बदलने से कतराते हैं। अगर 2,500 रुपये में ट्यूबिंग बदल रही है, तो यह बेहद अच्छी बात है। इससे इंफेक्शन का खतरा ही नहीं रहेगा।

- डॉ. राजकुमार, कुलपति, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा

(अस्वीकरणः फेसबुक के साथ इस संयुक्त अभियान में सामग्री का चयन, संपादन व प्रकाशन जागरण समूह के अधीन है।)

Posted By: Sanjeev Tiwari

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