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गगन कोहली, राजौरी। कश्मीर में फिलहाल कफ्र्यू लगा हुआ है। शौर्य चक्र विजेता शहीद औरंगजेब के पुंछ स्थित सलानी गांव में भी कफ्र्यू है। लेकिन यह गांव कश्मीर के दूसरे गांवों से जुदा है। देश के लिए जज्बा रखने वाले सिपाहियों, सैनिकों और वतन पर कुर्बान हो जाने वाले शहीदों का गांव।

यह औरंगजेब जैसे बेटे और राज बेगम जैसी मां का गांव है। ऐसी मां जिसने एक बेटे की शहादत के बाद दो और बेटों को देश सेवा में समर्पित कर दिया। वह दो छोटे बेटों को भी सैनिक बनाना चाहती हैं। कुछ दिन पहले जब दैनिक जागरण की टीम सलानी पहुंची तो यहां के हर घर में ऐसा जज्बा देखने को मिला।

इस इलाके के 100 से अधिक युवक सेना में शामिल हो चुके हैं। इन्हीं में राज बेगम के तीन बेटे भी शामिल हैं, जबकि एक बेटा (राइफलमैन औरंगजेब) शहीद हो चुका है। पांचवां बेटा सैनिक स्कूल में पढ़ रहा है। गत वर्ष औरंगजेब की शहादत हुई थी। आतंकियों ने धोखे से अगवा कर उन्हें मार डाला था। हालही औरंगजेब की मां राज बेगम की वह तस्वीर लोगों के दिलों में उतर गई, जिसमें वह अपने दो बेटों को सेना में भर्ती होने के बाद माथा चूमते हुए आशीष दे रही हैं।

इस ममतामयी और साहसी मां ने दैनिक जागरण से कहा, ऐसा करते हुए न कोई डर था और न शिकन, बस था तो फख्र। मैंने बेटों से कहा कि मेरे दूध की लाज रखना...। भावुक कर देने वाला दृश्य था वह। मां का जज्बा देख पूरा देश एक सुर में कह रहा था कि अगर हर मां ऐसी हो तो देश का दुश्मन आंख उठाकर देखने का साहस नहीं कर पाएगा। बेटों को सेना की वर्दी में देख पिता का सीना भी गर्व से चौड़ा था।

14 जून 2018 को कश्मीर में आतंकवादियों ने सेना के राइफलमैन औरंगजेब का तब धोखे से अपहरण कर लिया था जब वह ईद मनाने अपने घर जा रहे थे। आतंकियों की आंखों में आखें डालकर और बिना डरे, बिना सिर झुकाए वह शहीद हो गए। उनकी इस निडरता को देख मरणोपरांत उन्हें शौर्य चक्रसे सम्मानित किया गया। ठीक साल भर बाद जुलाई, 2019 में औरंगजेब के दो छोटे भाई सेना में भर्ती हो गए।

शहीद की मां राज बेगम ने दोनों लाड़लों तारिक और शब्बीर का माथा चूम मानो उन्हें देश के नाम करने का एलान कर दिया। राज बेगम कहती हैं, मैंने अपना बेटा खोया पर मुझे उसकी वीरता और देश के लिए उसके जज्बे पर गर्व है। उसकी मां होने पर मैं फख्र महसूस करती हूं। अब मैंने अपने दो और बेटे देश के नाम कर दिए हैं। अगर यह दोनों भी देश के काम आ गए तो मुझे गम नहीं गर्व होगा। मैं दो छोटे बेटों को भी सैनिक बनाऊंगी। तारिक और शब्बीर के पिता जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के पूर्व सिपाही मुहम्मद हनीफ ने कहा, मेरे बेटे ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। मेरे बाकी बेटे भी देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार हैं। हम आतंक का अंत चाहते हैं। बड़ा बेटा मुहम्मद कासिम 12 साल से सेना में सेवाएं दे रहा है। अब दो और बेटे सेना में शामिल हो गए हैं।

पुंछ जिले का सलानी गांव आज देशप्रेम की मिसाल बन गया है। खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे गांव के 55 युवा नौकरी छोड़ कर आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए अपने गांव लौट आए। तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी सलानी गांव पहुंचे थे और लोगों के जज्बे को सलाम किया था।

एक भाई पहले से है सेना में
शहीद औरंगजेब का बड़ा भाई मोहम्मद कासिम पहले से ही सेना में है और करीब 12 साल से सेना में सेवाएं दे रहा है। अब दो भाई और सेना में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा दो छोटे भाई आसम और सोहेल अभी पढ़ रहे हैं।

आतंकवाद का डट कर मुकाबला करेंगे मेरे दोनों बेटे
शहीद औरंगजेब के पिता मुहम्मद हनीफ ने कहा कि औरंगजेब की शहादत के बाद सेना ने उन आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। पर आतंकवाद कि खिलाफ लड़ाई अभी भी जारी है। अब तारीक व शब्बीर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। दोनों भाई मिलकर आतंकवाद की कमर तोडऩे का कार्य करेंगे और आतंकवाद को समाप्त करके की दम लेंगे। उन्होंने कहा कि मुङो गर्व है कि मेरे बेटे ने देश के लिए उसने अपने प्राणों की आहुति दे दी। अब मेरे यह दोनों बेटे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक अंजाम तक पहुंचाएंगे।

आतंकियों की बर्बरता के बावजूद झुकने न वाले शहीद औरंगजेब की लड़ाई को अब उसके भाई पूरी करेंगे। उनके दो और भाइयों ने अब सेना की वर्दी पहन ली है।

औरंगजेब की ही तरह तारिक और शब्बीर में भी देशप्रेम कूट-कूट कर भरा हुआ है। यह इन युवाओं के जज्बे के कारण ही है कि जहां पहले कभी आतंकवाद की तूती बोलती थी, आज हमारे गांव की तरफ आतंकवादी आंख उठाकर देखने का भी साहस नहीं कर पाते हैं।
- मुहम्मद खालिक चौहान, सरपंच, सलानी गांव

शहीद औरंगजेब के पिता व दादा भी सेना में थे। माता पिता ने अपने दो और बेटों की सेना में भेजकर आतंक के पैरोकारों को संदेश दिया है कि उनके दिन लद चुके।
- ब्रिगेडियर (रिटा.) अनिल गुप्ता

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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