नई दिल्ली, प्रेट्र। कोरोना वायरस से जंग के लिए कोई टीका ईजाद होने में अभी लंबा समय लग सकता है। वायरस से निपटने में सक्षम कोई नई दवा बनाना भी रातोंरात का खेल नहीं है। यही कारण है कि वैज्ञानिक अन्य बीमारियों में पहले से प्रयोग में आ रही दवाओं में संभावना तलाश रहे हैं। एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर इस मामले में सबसे आगे चल रही है। अब तक के परीक्षण में इसे कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति को ठीक करने में सबसे तेज पाया गया है।

कोविड-19 के खिलाफ 130 से ज्यादा दवाओं का चल रहा है क्लीनिकल ट्रायल

अमेरिका के मिल्केन इंस्टीट्यूट के ट्रैकर के मुताबिक, इस समय 130 से ज्यादा दवाओं का ट्रायल चल रहा है। इनमें से कुछ दवाएं वायरस के प्रसार को रोकने में सक्षम पाई गई हैं, तो कुछ दवाएं इम्यून सिस्टम की अतिसक्रियता को कम करने में सहायक हैं। कोरोना वायरस का संक्रमण अन्य वायरस की तुलना में शरीर में धीरे-धीरे फैलता है, इसलिए कई बार इम्यून सिस्टम की अतिसक्रियता अंगों को नुकसान पहुंचा देती है। 

पहले से ही प्रयोग में आ रही दवाओं में ही संभावना तलाश रहे हैं वैज्ञानिक

सीएसआइआर से संबद्ध इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन, जम्मू के डायरेक्टर राम विश्वकर्मा ने कहा कि अभी सबसे प्रभावी तरीका यही है कि पहले से ही इस्तेमाल में आ रही किसी दवा को कोरोना के खिलाफ इस्तेमाल किया जाए। क्लीनिकल ट्रायल में चल रही दवा रेमडेसिविर इसका बेहतर उदाहरण है। रेमडेसिविर लोगों को तेजी से ठीक होने में मदद करती है और कोरोना के कारण गंभीर रूप से बीमार लोगों में जान जाने की आशंका को कम करती है।

रेमडेसिविर को अमेरिकी दवा कंपनी गिलियड साइंसेज ने बनाया है। अमेरिकी दवा नियामक ने कोरोना के गंभीर मरीजों पर इसके प्रयोग की अनुमति भी दे दी है। जापान में प्रमाणित एंटीवायरल दवा फेविपिराविर को भी काफी हद तक कोरोना पर प्रभावी पाया गया है। इसका भी क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस