नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। ऐसे में एक बड़ी चिंता खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि तमाम परेशानियों के बावजूद पंजाब में इस बार गेहूं का न सिर्फ जबरदस्त उत्पादन हुआ है, बल्कि केंद्र सरकार ने स्पेशल ट्रेन चलाकर इसे अन्य जगहों तक पहुंचाने का काम भी शुरू कर दिया है।

पंजाब के खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि मई के पहले हफ्ते में कोविड-19 के कारण पैदा हुई मुश्किलों के बावजूद बीते 19 दिनों के दौरान राज्य में 90 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद सफलतापूर्वक कर ली गई है। इस बार लगभग 135 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जानी है। आशु ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार इस काम में शामिल सभी लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए राज्य की 4000 मंडियों में सामाजिक दूरी सम्बन्धी नियम का सख्ती से पालन करने जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह संतोषजनक बात है कि लेबर की कमी और जूट मिलों के बंद होने के बावजूद 19 दिनों में ही 90 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद कर ली गई है।

इस तरह किया चुनौती का सामना

पंजाब को 13.5 मिलियन टन के खरीद लक्ष्य को पूरा करने के लिए 3.5 से 4 लाख मजदूरों की आवश्यकता होती है। इनमें 90 फीसदी मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश से आते हैं। ये मजदूर 15 अप्रैल तक पंजाब पहुंचते हैं। पर लॉकडाउन की वजह से ऐसा संभव नहीं हो सका। मंडियों में ज्यादा भीड़ न हो, इसके लिए पंजाब सरकार ने खरीद-फरोख्त को 15 जून तक बढ़ा दिया। फूड एंड सिविल सप्लाई डिपॉर्टमेंट और पंजाब मंडी बोर्ड (पीएमबी) ने 3,447 गेहूं खरीद केंद्र बनाए हैं। पहले यहां 1849 अनाज मंडी केंद्र थे। इसके लिए सरकार ने 27 लाख कूपन किसानों में बांटे हैं। ऐसे में वे गेहूं अपनी बारी के हिसाब से मंडी में आएंगे। मई के पहले हफ्ते तक 13,80,000 कूपन जारी कर दिए गए थे। रोजाना 70,000 से 1 लाख कूपन जारी किए गए।

स्टोरेज यूनिट और भंडारगृह तक गेहूं पहुंचाने के लिए डिजाइनर ट्रक का इस्तेमाल किया गया। पंजाब मंडी बोर्ड के जी पी एस रंधावा ने बताया कि मंडियों में भीड़ रोकने के लिए कूपन जारी किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जो भी शिकायत आ रही है, उसे तुरंत सुलझाया जा रहा है। इसके अलावा पंजीकृत आढ़तियों को भी 15 से 20 कामगार दिए गए। ये कामगार निर्माण, कैटरिंग और टैक्सी ड्राइवर थे। इसके साथ ही हर एजेंट को 20 से 200 किसानों का जिम्मा दिया गया। इन किसानों की फसल बेचने का काम और उन्हें कूपन दिलाना एजेंट की जिम्मेदारी थी।

ट्रेनों से हो रही सप्लाई

अनाज से भरी अन्नपूर्णा ट्रेन ने तत्परता से देशभर के दस राज्यों में जरूरतमंदों तक खाद्यान्न पहुंचाया गया है। पहली बार है जब रेलवे ने इतने बड़े पैमाने पर खाद्यान्न पहुंचाया है। पंजाब के ढंढारीकलां से असम के न्यू जलपाइगुड़ी तक दो इंजन और दो अतिरिक्त डिब्बों सहित 88 डिब्बों की अन्नपूर्णा मालगाड़ी ने 49 घंटे 50 मिनट में 1634 किलोमीटर (किमी) का सफर तय कर इतिहास रच दिया था। पहले यह दूरी तय करने में 96 से 100 घंटे तक लग जाते थे।

पंजाब के खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री भारत भूषण आशु ने बताया कि मई के शुरुआती हफ्ते में चावल और गेहूं 1031 स्पेशल ट्रेनों में लोड किए गए। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने कहा कि रेल की इस भूमिका का महत्‍व और भी अधिक बढ़ जाता है, जब केन्‍द्र सरकार यह सुनिश्चित करने का विशेष रूप से प्रयास कर रही है कि आवश्‍यक वस्‍तुओं की आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के साथ-साथ कृषि उपज को भी विभिन्‍न राज्‍यों तक बिना किसी बाधा के पहुंचाया जाए। बढ़ती हुई आवश्‍यकताओं व मांग के मद्देनज़र उत्‍तर रेलवे ने 5000 टन खाद्यान्‍न भार वाली लम्‍बी दूरी की अन्‍नपूर्णा मालगाड़ियां चलाई हैं। ऐसी 25 अन्‍नपूर्णा मालगाड़ियां उत्‍तर रेलवे द्वारा पंजाब सहित देश के विभिन्‍न भागों के लिए चलाई गई। लॉकडाउन के बाद से उत्‍तर रेलवे राज्‍यों को खाद्यान्‍न की आपूर्ति करने में सबसे आगे है ।

लॉकडाउन अवधि के दौरान कुल खाद्यान्‍न लदान का लगभग 53% अकेले उत्‍तर रेलवे द्वारा किया गया है। उत्‍तर रेलवे ने खाद्यान्‍न के 573 रैकों (1.57 मिलियन टन) का लदान किया, जो कि पिछले वित्‍तीय वर्ष की तुलना में 0.90 मिलियन टन (135% ज्‍यादा ) अधिक है। उत्‍तर रेलवे ने 15.75 लाख टन, खाद्यान्‍न भेजा, जो कि पिछले वर्ष से 137% अधिक है। पंजाब के फिरोजपुर, अंबाला औऱ दिल्ली डिविजन से बड़ी तादाद में खाद्यान्न आपूर्ति के लिए ट्रेनें चलाई गईं। 

Posted By: Vineet Sharan

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