'PoK हिंसा पाकिस्तानी शोषण का परिणाम', भारत की इस्लामाबाद को दो टूक
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों ने कई हफ्तों से विरोध प्रदर्शन जारी रखा है। इन्हें ...और पढ़ें

HighLights
गुलाम जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, छह की मौत, भारत ने की निंदा
रावलकोट में सेना हटाने और इंटरनेट बहाल करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां
भारत ने कहा- नागरिकों पर दमन और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन के लिए पाकिस्तान जवाबदेह
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा है कि में पीओजेके में हो रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे अवैध कब्जे, शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक उत्पीड़न का सीधा नतीजा हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय आबादी की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तानी प्रशासन ने अत्यधिक पुलिस क्रूरता का सहारा लिया है। इसमें असहाय महिलाओं और बच्चों के खिलाफ की गई कार्रवाई, भोजन और दवाओं जैसी आवश्यक चीजों को रोकना, इंटरनेट ब्लैकआउट लगाना और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप कई दुखद मौतें हुई हैं।
भारत ने पाकिस्तान को ठहराया जिम्मेदार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों को दबाने के लिए हिंसक तरीके अपना रहा है। इसके साथ ही भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इन घोर मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए।
पीओके में 6 लोगों की मौत
बता दें कि गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में मंगलवार को प्रदर्शन एक बार फिर हिंसक हो गया। रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में छह लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है। बता दें कि इससे पहले भी पुलिस फायरिंग में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की।
लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवा बंद
एएनआई के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिलाओं, बच्चों और सामुदायिक नेताओं सहित करीब 100 लोग नागरिक इलाकों से सेना हटाने, लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवा बहाल करने और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की, वहीं कुछ लोगों ने मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पुंछ और डोडा सेक्टर खोलने की मांग भी उठाई।
रोटी को भी तरस रहे लोग
पीओके में जारी आर्थिक संकट और खाद्य असुरक्षा ने भी स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं, जिससे पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष लगातार गहरा रहा है। वहीं, इस घटना से एक दिन पूर्व ही पीओजेके समुदाय के लोगों ने अमेरिका में व्हाइट हाउस के बाहर एकत्र होकर इस क्षेत्र में खराब हो रहे मानवीय हालात की तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान केंद्रित करने की अपील की थी।
