हेमंत कश्यप, जगदलपुर। बस्तर के माचकोट के जंगल में आसपास चार बेहद पुराने सागौन के पेड़ हैं। इनका नाम राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न रखा गया है। राम की आयु साढ़े पांच सौ साल है और इसे भारत का सबसे प्राचीन सागौन का पेड़ माना जाता है। प्राकृतिक कारणों से आठ साल पहले ही भरत सूख चुका है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इन पेड़ों को अपने पर्यटन नक्शे में शामिल कर वन कक्ष क्रमांक 1910 को संरक्षित करवा दिया है।

इन पेड़ों की उम्र 375 से लेकर 550 वर्ष के बीच 

छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा का यह सघन वन धुर नक्सल प्रभावित है, इसलिए सैलानी इन दुर्लभ पेड़ों का दीदार नहीं कर पा रहे हैं। वन विभाग के अफसरों के अनुसार बस्तर वनमंडल के माचकोट वन परिक्षेत्र अंतर्गत तोलावाड़ा बीट में खड़े इन पेड़ों की उम्र 375 से लेकर 550 वर्ष तक है। क्षेत्र के ग्रामीण इन्हें देव पेड़ मानते हैं। कुरंदी के वयोवृद्ध ग्रामीण बृजलाल विश्वकर्मा बताते हैं कि भगवान राम का दंडकारण्य से गहरा संबंध रहा है। इसलिए इन पेड़ों के उम्र के आधार पर नामकरण राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न किया गया है।

ग्राम तिरिया की सरपंच धनमती नाग बताती हैं कि जनस्रुति यह भी है कि कुछ ग्रामीण सागौन के इन पुराने पेड़ों को काटने पहुंचे थे। जैसे ही कुल्हाड़ी चली, इन पेड़ों से इंसानी आवाजें आईं, जिसे सुनकर ग्रामीण डर गए। तब से देव पेड़ मान कभी इन पेड़ों को काटने की कोशिश नहीं की। पौराणिक मान्यता है कि गुप्तेश्वर भगवान राम का चातुर्मास के दौरान आश्रय स्थल रहा है। गुप्तेश्वर जाने वाले भक्त इन रामनामी सागौन को देखना शुभ मानते हैं। यह पेड़ तिरिया-गुप्तेश्वर मुख्य मार्ग से छह किमी दूर हैं।

सूख गया भरत के नाम पेड़ 

वन परिक्षेत्र माचकोट के रेंजर विनय चक्रवर्ती बताते हैं कि भारत में करीब 550 साल पुराना सागौन का जीवित पेड़ और कहीं नहीं है इसलिए यह रामनामी सागौन का पेड़ विलक्षण और दुर्लभ है। वन विभाग द्वारा इसकी विशेष निगरानी की जाती है। रामनामी सागौन पेड़ की गोलाई 598 सेंटीमीटर तथा ऊंचाई 40.05 मीटर है। भरत की गोलाई 536 सेंटीमीटर तथा ऊंचाई 45.50 मीटर है। यह पेड़ आठ साल पहले सूख चुका है। विभाग द्वारा जबलपुर के पेड़ विशेषज्ञों को बुलवाकर भरत को बचाने का प्रयास किया गया था परंतु उम्रदराज होने के कारण इसे नहीं बचाया जा सका। हालांकि सूखा पेड़ अब भी खड़ा है।

कुछ ने ही किया दीदार

माचकोट जंगल में खड़े साल के इन विशाल व दुर्लभ पेड़ों तक सैलानी पहुंच सकें और इन्हें देख सकें, इसके लिए 10 साल पहले छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष संतोष बाफना ने एक पर्यटन पथ बनाकर सैलानियों को तोलावाड़ा बीट तक पहुंचाने का प्रयास किया था। यह इलाका अति संवेदनशील होने के कारण सैलानी यहां जाने से घबराते हैं। प्रतिवर्ष जब गुप्तेश्वर में महाशिवरात्रि का मेला लगता है तब ही कुछ लोग ही समूह बनाकर इन पेड़ों को देखने पहुंचते हैं।

दुर्लभ सागौन पेड़ों का विवरण

नाम- गोलाई-ऊंचाई्

राम 598 सेमी  40.05 मीटर, लक्ष्मण 500 सेमी 40.40 मीटर, भरत 536 सेमी 45.50 मीटर, शत्रुघ्न 314 सेमी 38.05 मीटर

सीता और हनुमान भी

तोलावाड़ा कक्ष क्रमांक 1910 में सागौन के दो पुराने पेड़ और मिले हैं। इन्हें क्रमश: सीता और हनुमान नाम दिया गया है। सीता नामक सागौन पेड़ की गोलाई 2.60 मीटर तथा ऊंचाई 34.90 मीटर है। इसी तरह हनुमान की गोलाई 2.72 मीटर तथा ऊंचाई 35.40 मीटर पाई गई है। अब क्षेत्रवासी तोलावाड़ा जंगल में पूरा रामदरबार होने की बात श्रद्धा से कहने लगे हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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