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राम मंदिर में चढ़ावा गिनती के दौरान हुई थी चोरी, प्रॉपर्टी में हुआ निवेश; चार्जशीट दाखिल होते ही SC ने याचिकाओं का किया निपटारा

Published: Mon, 02 Nov 2026 10:39 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद लंबित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने निपटाईं चढ़ावा चोरी से जुड़ी याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट ने निपटाईं चढ़ावा चोरी से जुड़ी याचिकाएं

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने चढ़ावा चोरी याचिकाओं का निस्तारण किया।

  2. निचली अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ।

  3. याचिकाकर्ताओं को न्यायिक मजिस्ट्रेट की मदद की अनुमति।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में निचली अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो जाने को देखते हुए शीर्ष कोर्ट में लंबित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि चोरी की घटनाएं मुख्यतः चढ़ावा गणना के दौरान हुईं।

इसके बाद शीर्ष अदालत मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली लंबित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए अपने आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है जिसके अनुसार आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है।

जिसे देखते हुए रिट याचिकाओं और उससे जुड़े अन्य मामलों का निस्तारण किया जाता है, संबंधित अदालत कानून के मुताबिक आगे कार्यवाही करेगी।

ये आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर करने के बाद दिए। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई थी जिनमें राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के आदेश देने की मांग की गई थी।

पीठ ने मामले जनहित का पहलू शामिल होने के कारण याचिकाकर्ताओं को सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई में मदद करने की अनुमति दे दी पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को छूट होगी कि वे संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की उसी तरह सहायता कर सकते हैं, जैसे कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की मदद करने का अधिकार देता है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।

मामले पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एसआइटी जांच में सामने आया कि चोरी मुख्यतः चढ़ावा गणना के दौरान हुई। कहा कि जो लोग पैसे गिन रहे थे उन्होंने ही पैसे निकाल लिए।

सालिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपियों ने चोरी की रकम निवेश की जैसे प्रापर्टी खरीदी। बैंक मे भी पैसे जमा किये। प्रापर्टी के लेन देने का उदाहरण देते हुए मेहता ने बताया कि हमारे पास आंकड़े मौजूद हैं सेल डीड में भले ही 15 लाख की रकम दिखाई गई हो लेकिन असल में उस प्रापर्टी की कीमत 50 लाख रुपये थी।

बाकी रकम नगद में दी गई थी जो कि गबन के पैसे से आयी थी। मेहता ने कहा कि आडिट भी कराया गया जिसमें सभी कलाकृतियां और चढ़ावा सामान सुरक्षित पाए गए। तभी चीफ जस्टिस ने मेहता से भविष्य को लेकर चिंता जताई। जिस पर मेहता ने आश्वासन दिया कि कुछ कदम उठाए गए हैं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपपत्र दाखिल होने की बात को रिकार्ड पर लेते हुए लंबित याचिकाओं का निपटारा कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित थीं जिनमें राम मंदिर चढ़ावा चोरी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी। साथ ही ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का व्यापक आडिट कराने की भी मांग की गई थी।

गत 21 सितंबर को हुई सुनवाई में सालिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आरोपों की जांच कर रही एसआइटी ने लगभग अपनी जांच पूरी कर ली है और दो दिन में आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा ताकि आरोपियों को डिफाल्ट बेल यानी कानून में निर्धारित 90 दिन की अवधि में आरोपपत्र दाखिल न होने पर जमानत मिलने का अधिकार न हो।

राम मंदिर पर नई याचिका पर विचार से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राम मंदिर के फैसले में दी गई डिक्री में जमीन के सीमांकन से संबधित एक नयी याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस संबंध में सिविल कोर्ट जा सकता है।

श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट नामक संस्था ने चीफ ट्रस्टी कामेश्वर नाथ राय के जरिये रिट याचिका दाखिल कर मांग की थी कि कोर्ट के राम जन्मभूमि मामले में नौ नवंबर 2019 को दिये गए फैसले के अनुरूप किसी सक्षम अथारिटी से जमीन का निष्पक्ष और स्वतंत्र सीमांकन कराया जाए। लेकिन कोर्ट ने मामले पर विचार करने से स्पष्ट इन्कार कर दिया।

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