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पूर्वोत्तर में रेलवे लगाएगा ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, बारिश-भूस्खलन से हादसे रोकने में मिलेगी मदद

Published: Sat, 16 May 2026 04:48 PM (IST)

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे मई अंत तक असम, मिजोरम और मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगा रहा है। ...और पढ़ें

पूर्वोत्तर में रेलवे लगाएगा ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (फाइल फोटो)

पूर्वोत्तर में रेलवे लगाएगा ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मई अंत तक वेदर स्टेशन होंगे चालू।

  2. भारी बारिश, भूस्खलन से रेल हादसों की रोकथाम।

  3. असम, मिजोरम, मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में स्थापना।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाने की शुरुआत की है। मई महीने के अंत तक असम, मिजोरम और मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में यह सिस्टम चालू हो जाएगा। इसका उद्देश्य भारी बारिश और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों में समय रहते रेल हादसों को रोकना है।

क्या है ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन?

यह एक ऐसा आधुनिक सिस्टम है, जो बिना इंसानी मदद के लगातार मौसम की जानकारी कंट्रोल रूम तक भेजता रहता है। इससे रेलवे को हर पल मौसम की सही स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।

पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून के दौरान अचानक बाढ़ और पहाड़ खिसकने की घटनाएं आम होती हैं। नए सिस्टम की मदद से रेलवे को पहले ही चेतावनी मिल जाएगी, जिससे जरूरत पड़ने पर ट्रेनों को रोका जा सकेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

सिस्टम में क्या है खास?

यह वेदर स्टेशन अत्याधुनिक सेंसर से लैस होगा। यह एक घंटे में 900 मिलीमीटर तक की भारी बारिश को माप सकता है। इसके अलावा यह माइनस 40 डिग्री से लेकर प्लस 75 डिग्री तक तापमान रिकॉर्ड करने में सक्षम है। सिस्टम 80 मीटर प्रति सेकंड तक की तेज हवा की रफ्तार को भी ट्रैक कर सकेगा।

रेलवे की ओर से यह सिस्टम असम के लुमडिंग-बदरपुर सेक्शन, मिजोरम को जोड़ने वाले कटाखल-भैराबी रूट और मणिपुर के जिरीबाम-इंफाल सेक्शन में लगाया जा रहा है। इन स्टेशनों में बिजली की आपूर्ति सौर ऊर्जा और बैकअप बैटरी से होगी, ताकि भारी बारिश या आपदा के दौरान बिजली कटने पर भी सिस्टम बंद न हो।

मौसम विभाग के रहते जरूरत क्यों?

देश में मौसम विभाग पहले से मौसम संबंधी जानकारी देता है, लेकिन रेलवे अपनी जरूरत और भौगोलिक चुनौतियों के अनुसार चुनिंदा संवेदनशील इलाकों में अलग से वेदर स्टेशन लगा रहा है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां मानसून के दौरान रेल ट्रैक को सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

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