अब रेलवे से क्लेम लेना हुआ आसान, नहीं लगाने होंगे RCT के चक्कर; घर बैठे कर सकेंगे दावा
रेल यात्रियों के लिए मुआवजा प्रक्रिया अब आसान होगी। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल की 23 बेंचों को ई-आरसीटी सिस्टम के तहत ...और पढ़ें

अब रेलवे से क्लेम लेना हुआ आसान।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रेल यात्रियों को मुआवजा पाना पहले से ज्यादा आसान होने जा रहा है। रेल हादसे, चोट, मौत या सामान के नुकसान की स्थिति में मुआवजा लेने के लिए रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (आरसीटी) की बेंच में बार-बार जाने की जरूरत नहीं होगी। ई-आरसीटी सिस्टम के तहत देशभर की सभी 23 आरसीटी बेंच को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
यात्री या उनके परिजन रात-दिन कभी भी घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से क्लेम पाने का दावा कर सकेंगे। जरूरी दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। प्रत्येक अपडेट की जानकारी एसएमएस और ई-मेल से मिलेगी।
आरसीटी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाएगा
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्ते-52 सुधार अभियान के तहत गुरुवार को दो बड़े बदलावों की घोषणा की। पहला आरसीटी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाएगा। दूसरा रेल टेक पालिसी के जरिए स्टार्टअप और नवाचार करने वालों को सीधे रेलवे से जोड़ा जाएगा। अब तक लोगों को दिक्कत होती थी क्योंकि घटना किसी एक राज्य में होती थी और यात्री दूसरे राज्य का होता था। ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि केस कहां दायर करें।

सुनवाई की तारीख जानने, दस्तावेज जमा करने और आदेश की प्रति लेने में समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। नई डिजिटल व्यवस्था में केस की पूरी जानकारी ऑनलाइन रहेगी। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सुविधा भी मिलेगी। इससे यात्रा और वकील पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम से मामलों का निपटारा तेज
रेलमंत्री का कहना है कि ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम से मामलों का निपटारा तेज होगा। फाइल गुम होने या देरी की समस्या कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। आदेश और फैसले भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।
‘रेल टेक पॉलिसी’
दूसरा बड़ा सुधार ‘रेल टेक पॉलिसी’ है। इसके तहत कोई भी स्टार्टअप, शोध संस्थान या उद्योग रेलवे से जुड़े किसी मुद्दे पर अपना समाधान प्रस्तावित कर सकता है। पहले की नीति में रेलवे खुद समस्या तय करता था और उसी पर समाधान मांगे जाते थे। अब कोई भी व्यक्ति या संस्था रेलवे की कार्यप्रणाली से जुड़े किसी भी क्षेत्र सुरक्षा, रखरखाव, यात्री सुविधा या संचालन में नई तकनीक का सुझाव दे सकती
प्रस्ताव आने पर संबंधित विभाग उसकी उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच करेगा। मंजूरी मिलने पर पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। सफल होने पर लागू किया जाएगा। इसके लिए अलग बजट नहीं होगा। जिस विभाग से संबंधित प्रस्ताव होगा, उसी के बजट से खर्च किया जाएगा।
नई नीति के तहत एआई आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली, कोच में आग का तुरंत पता लगाने वाली तकनीक, ड्रोन से टूटी पटरी की जांच और रेल ट्रैक पर तनाव की निगरानी जैसे समाधान प्रोत्साहित किए जाएंगे। इससे हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा बढ़ेगी।
