'लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वालों को न्याय के कठघरे में खड़ा करेंगे', INDI गठबंधन के नेताओं ने लिया संकल्प
राहुल गांधी की चाय पर हुई बैठक में विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने 'वोट चोरी' के खिलाफ 'लोकतंत्र बहाली' के लिए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।

INDI गठबंधन के नेताओं ने लिया संकल्प (फोटो-एएनआइ)
HighLights
वोट चोरी के खिलाफ लोकतंत्र बहाली आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पाबंदी का विरोध करने का एलान।
संजय मिश्र, नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चाय पर हुई बैठक में मंगलवार को तमाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ छात्र व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग जुटे। उन्होंने वोट चोरी-एसआइआर के विरुद्ध आंदोलन को देश में 'लोकतंत्र की बहाली का संग्राम' बताते हुए लक्ष्य हासिल होने तक राजनीतिक लड़ाई जारी रखने का एलान किया।
विपक्षी नेताओं के साथ सिविल सोसाइटी के लोगों को चाय पर बुलाकर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की लड़ाई के दायरे को अब और विस्तार देने के विपक्ष के इरादे साफ कर दिए।
वोट चोरी के विरुद्ध विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च को बेहद सफल बताते हुए लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ाने वालों को न्याय के कठघरे में खड़ा करने का विपक्षी पार्टियों ने एकजुट संकल्प जाहिर किया।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के नागरिकों के अधिकार पर पूर्ण पाबंदी को अस्वीकार्य बताते हुए इसका प्रतिरोध करने और चुनौती देने की घोषणा की। वहीं सुप्रीम कोर्ट तथा प्रधान न्यायाधीश का पूरा सम्मान करने की बात कहते हुए राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायपालिका के साथ कांग्रेस के टकराव की अटकलों को अपनी तरफ से विराम दे दिया।
INDI गठबंधन के अगले कदम पर सस्पेंस
वोट चोरी के मुद्दे पर सोमवार को विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट मार्च की सफलता के मद्देनजर राहुल ने अपने आवास पांच सुनहरी बाग रोड पर मंगलवार को आइएनडीआइए में शामिल दलों के नेताओं-सांसदों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को चाय पर आमंत्रित किया था।
बैठक में आगे की रूपरेखा और रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन इसे उजागर नहीं किया गया। जैसा कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा भी कि अगले कदमों पर सस्पेंस बनाए रखना भी रणनीति है।
सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च की सफलता का श्रेय राजनीतिक दलों के बजाय नागरिकों को देते हुए कहा कि वास्तव में यह भारत के लोगों का प्रदर्शन था और लोकतंत्र बहाली की इस लड़ाई में हम सभी एकजुट हैं।
बैठक में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता व वकील प्रशांत भूषण ने इस लड़ाई को विस्तार देने के लिए विपक्ष के साथ समाज के हर वर्ग के जुड़ने की बात कहते हुए बताया कि किसान संगठनों से भी चर्चा हुई और वे भी इसमें शामिल होंगे।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने कहा कि चुनाव व्यवस्था को बर्बाद कर संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए देश में लोकतंत्र को खत्म किया गया है। मगर यह इतना आसान नहीं है कि कोई भारत के संविधान को "नष्ट" करने के बाद बचकर निकल जाए। हम देश के लोगों को विश्वास दिलाते हैं कि "वोट चोरी" में शामिल लोगों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।
राहुल गांधी ने कहा, 'इसके मुख्य सूत्रधार मोदी हैं, अमित शाह व ज्ञानेश कुमार एवं अन्य ने इसे कार्यान्वित किया है। उन्हें यह समझना होगा कि उन पर अब शिकंजा कस रहा है।"
केरलम कांग्रेस के एक्स हैंडल से प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का इस्तीफा मांगने एवं तत्काल इसे डिलीट करने के विवाद का उल्लेख किए बिना राहुल ने कहा कि वह प्रधान न्यायाधीश और न्याय व्यवस्था का बहुत सम्मान करते हैं। उनकी एक भूमिका है और उम्मीद है कि वह उस भूमिका को निभाएंगे।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की पाबंदी के फैसले का विरोध करने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अब सरकार ने तय किया है कि लोकतांत्रिक भावनाओं को जाहिर करने के लिए इस जगह का उपयोग नहीं कर सकते। मगर सरकार के लिए यह तय करना इतना आसान नहीं होगा कि भारत के लोग अपनी आवाज के लिए नहीं लड़ेंगे।
राहुल की इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा के हरेंद्र मलिक व अन्य, राजद के तेजस्वी यादव व मनोज झा, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा, सीपीआइ-एमएल के दीपांकर भटटाचार्य, झामुमो की महुआ मांझी, टीएमसी-एम की महुआ मोइत्रा व सागरिका घोष, आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा, सिविल सोसाइटी के चर्चित चेहरे प्रशांत भूषण व योगेंद्र यादव समेत बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस के चर्चित सांसद शशि थरूर भी उपस्थित रहे।
तेजस्वी ने बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने एक कठपुतली की तरह काम किया है और उसके लिए उन्हें निश्चित रूप से सजा मिलेगी।
माकपा महासचिव बेबी ने कहा, "ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी पार्टी की टीम में शामिल हो गए हैं। वे वोट, विरोध-प्रदर्शन की जगह और लोकतंत्र, सब चुरा लेते हैं।"
टीएमसी-एम की सागरिका घोष ने बंगाल, बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चुनाव चोरी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त कर चुनाव आयोग को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता।
