'महिलाओं पर हुए अपराधों के लिए उन्हें सजा देना बंद करें', राहुल गांधी का Gen Z प्रदर्शनों को समर्थन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिला सुरक्षा को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आजादी सीमित करना गलत है।
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिला सुरक्षा को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने केंद्र और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारें माहौल को सुरक्षित बनाने के बजाय महिलाओं के बाहर निकलने पर पाबंदियां लगा रही हैं, जो अपराधों से निपटने का सही तरीका नहीं है।
राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आजादी को सीमित करना गलत है। उन्होंने कहा कि असली कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ होनी चाहिए और अपराधों की सजा खुद महिलाओं को देना अब पूरी तरह बंद होना चाहिए।
आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद भड़का आक्रोश
यह विरोध प्रदर्शन दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद शुरू हुआ है। इस वारदात के विरोध में पिछले एक सप्ताह से सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवतियां शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि सार्वजनिक स्थानों को सभी के लिए सुरक्षित बनाया जाए, पुलिस की गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए तथा कानून-व्यवस्था के प्रति प्रशासन की जवाबदेही तय हो।
महिलाओं को सड़कों को सुरक्षित बनाना ही समाधान: राहुल गांधी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में महिलाएं सड़कों पर निकलने, छेड़छाड़ और दुष्कर्म की आशंका से डरी हुई हैं, लेकिन सरकार का एकमात्र समाधान यह होता है कि वे अपने घरों के अंदर रहें।
उन्होंने इसे पितृसत्तात्मक सोच करार दिया जो पीड़ितों को ही जिम्मेदार ठहराती है और अपराधियों को बचाती है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि असली समाधान महिलाओं को घरों में बंद करना नहीं, बल्कि सड़कों को सुरक्षित बनाना, पुरुषों की गलत मानसिकता को बदलना और दोषियों को बिना किसी रियायत के तुरंत कड़ी सजा देना है।
दिल्ली के कॉलेजों में बढ़ता विरोध
इस मामले को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय और राजधानी के अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। लेडी श्रीराम कॉलेज, मिरांडा हाउस, गार्गी कॉलेज और डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनों में हिस्सा लेते हुए सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने, लगातार होने वाली छेड़छाड़ और सुरक्षा के नाम पर महिलाओं पर थोपी जाने वाली पाबंदियों के खिलाफ आवाज उठाई है।
उधर, यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है, जहां अदालत ने दिल्ली सरकार और पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा में नाकामी को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं और जवाबदेही मांगी है।
जेन-जी से शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने की अपील
राहुल गांधी ने देश के युवाओं, विशेषकर नई पीढ़ी और युवतियों से बड़ी संख्या में इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के दर्द के प्रति बेपरवाह है और केवल दबाव में ही सुनती है।
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और वे पूरी मजबूती से छात्रों के साथ खड़े हैं। इस बीच, भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अबॉर्ट पैट्रिआर्की, बस बहुत हो गया और बड़े-बड़े शहरों में ऐसी छोटी सोच नहीं चलेगी जैसे नारों और तख्तियों के साथ सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद रखी।
