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दुबई का फिनटेक एप बना साइबर ठगी के पैसे को ठिकाने लगाने का प्रमुख जरिया, जांच में खुलासा

By Neelu RanjanEdited By: Shubham Kumar
Published: Tue, 14 Jul 2026 09:07 PM (IST)

यूएई का फिनटेक एप PYYPL भारत में साइबर ठगी के करोड़ों रुपये ठिकाने लगाने का मुख्य माध्यम बन गया है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

नीलू रंजन, नई दिल्ली। भारत में साइबर ठगी से कमाए गए करोड़ों रुपये को ठिकाने लगाने में यूएई का फिनटेक एप "पीवाइवाइपीएल" प्रमुख जरिया बन गया है। फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) द्वारा किये गए विश्लेषण और उसके आधार पर ईडी द्वारा किये गए जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

एफआईयू की आपरेशनल एनालाइसिस रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ तीन महीने (सितंबर से नवंबर 2023) में "पीवाइवाइपीएल" के सहारे भारतीय डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर 641 करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिये। पीवाइवाइपीएल ने इन रूपये को क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एफआईयू के विश्लेषण में बड़े "पीवाइवाइपीएल" से जुड़े हजारों भारतीय बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किये जाने का संदेह है। इनमें एचडीएफसी के 5599, आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के 3168 और इंड्सइंड बैंक के 1434 बैंक खाते शामिल हैं। ॉ

इन खातों में एक समान मोबाइल नंबर, ईमेल आइडी और पता का इस्तेमाल किया गया है। एफआईयू की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए ईडी ने एचडीएफसी के 937 खातों का विश्लेषण करते हुए "पीवाइवाइपीएल" से जुडे़ हाईवैल्यू खातों की सघन जांच चल रही है।

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इंड्सइंड बैंक के हाई वैल्यू 17 खातों की जांच में 900 करोड़ रुपये के साइबर ठगी की रकम आने और "पीवाइवाइपीएल" के सहारे उन्हें क्रिप्टोकरेसी में बदलने के सबूत भी मिले हैं। ये खाते फर्जी ई-कामर्स, सट्टा, जुआ और आनलाइन रम्मी प्लेटफार्म से जुड़ी 15 कंपनियों के हैं।

इनमें से रूडवेदा एजुकेशन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड और बावा वर्चुअल एसेट प्राइवेट लिमिटेड के जरिये तीन करोड़ 68 लाख टेथर के क्रिप्टोकरेंसी में बदल गया। टेथर दुनिया का सबसे भरोसेमंद और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली क्रिप्टोकरेंसी है।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एफआईयू और ईडी की जांच से सामने आये तथ्य महज बानगी भर हैं। साइबर ठगी की रकम को संगठित रूप से ठिकाने लगाने का काम इससे कई गुना ज्यादा पैमाने पर हो रहा है।

जांच से साफ है कि साइबर ठगी के रकम को हासिल करने, उन्हें विभिन्न खातों में घुमाकर छुपाने और विदेश स्थित सिंडिकेट के माध्यम से उन्हें ठिकाने लगाने के एक सुगठित व सुचारू से काम करने वाले वित्तीय आधारभूत संरचना काम कर रही है और उनसे निपटने के लिए उसी तरह बहु स्तरीय व बहुआयामी कार्रवाई की जरूरत है।